पटना में रावण दहन के बाद भगदड़, 32 की मौत,100 से अधिक घायल

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पटना (एसएनएन): बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में रावण दहन कार्यक्रम के बाद भगदड़ मचने से 32 लोगों की मौत हो गई है जबकि भगदड़ में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. सभी घायलों को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है. भगदड़ में ज्यादा महिलाएं ही घायल हुई हैं. भगदड़ के बाद लोगों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की है.
पटना में हेल्पलाइन नंबर है 0612-2219810
पटना रेंज के आई जी कुंदन कृष्णन ने मौत की पुष्टि की है. भगदड़ के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसी ने अफवाह फैला दी थी कि बिजली की तार मैदान में गिर गई है, जिसके बाद वहां भगदड़ मच गई. शाम में 5.30 बजे राज्य के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने यहां रावण दहन कार्यक्रम में हिस्सा लिया था.
गांधी मैदान में रावण दहन देखने के लिए करीब 50 हजार लोग मौजूद थे. गौरतलब है कि पटना में दो साल पहले भी छठ के दौरान भगदड़ मची थी जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त भी भगदड़ एक अफवाह की वजह से फैली थी.
मध्य प्रदेश के रत्नागढ़ मंदिर में पिछले साल नवरात्र के दौरान भी ऐसा हादसा पेश आया था जिसमें 115 लोग मारे गए थे. साल दर साल ऐसी घटनाओं में महिलाओं-बच्चों के कुचल कर मरने की घटनाओं के बावजूद भीड़ प्रबंधन के मानकों को पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारी गंभीरता से नहीं लेते. निकासी के पर्याप्त रास्तों का न होना भी भगदड़ के दौरान जानमाल के नुकसान की बड़ी वजह बनती है.
गांधी मैदान में लाखों की भीड़ के बीच अफवाह फैली कि बिजली का तार टूटकर गिर गया है और फिर भगदड़ मच गई. ऐसा ही दतिया जिले में हुए रत्नागढ़ मंदिर हादसे में हुआ था जब अफवाह फैली कि पुल टूटने वाला है. अफरातफरी में लोग पुल से नीचे नदी में कूदने लगे और महिलाएं-बच्चे खुद को नहीं बचा सके. इलाहाबाद में 10 फरवरी 2013 को कुंभ मेले के दौरान हुए हादसे में भी पुलिस की लापरवाही सामने आई थी. इस घटना में 36 लोगों की मौत हुई थी.
भगदड़ के लिए घोर लापरवाही करने वाले अफसरों पर मुकदमा भी चलाना चाहिए. इसके लिए राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए। ऐसी घटनाओं से दुनिया में देश का सिर शर्म से झुकता है और पर्यटन को नुकसान पहुंचता है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने खुद कहा है कि गांधी मैदान में ज्यादा से ज्यादा निकासी के द्वार बनाए जाने चाहिए. भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को पहले से पुख्ता इंतजाम करने चाहिए.
गांधी मैदान की घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन ने पहले तो बंद किए थे लेकिन बाद में खोल दिए गए जिससे भीड़ बढ़ती चली गई। पुलिस वीआईपी गाड़ियों के आगे-पीछे घूमने में ही व्यस्त थे. हजारों लोगों के निकलने के लिए सिर्फ एक गेट खोला गया था. पारा की रमा देवी का कहना है कि भगदड़ के बाद पुलिस के लाठीचार्ज करने से भी हालात बेकाबू हो गए और एक के ऊपर एक गिरते चले गए.
कुछ स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया है कि आखिर स्थानीय खुफिया प्रशासन क्या कर रहा था. उसे पता था कि नवमी और दशमी एक दिन होने के कारण भारी भीड़ जुटेगी. लोग दुर्गा पूजा पंडालों के साथ रावण दहन देखने को जुटेंगे.

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