पेट्रोल के दाम 65 पैसे घटे, डीजल पर फैसला मोदी के लौटने तक टला

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नयी दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने इससे पहले 16 सितंबर को लागत बढ़ने
के बावजूद दाम नहीं बढ़ाए थे, लेकिन
अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम नीचे आने के बाद इसमें कटौती की है। आज मध्यरात्रि
से पेट्रोल के दाम मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल किए बिना 54 पैसे लीटर कम किए गए हैं।
ये कीमतें आज रात से ही लागू हो गई है।
इस
कटौती के साथ दिल्ली में वैट सहित पेट्रोल का दाम 65
पैसे लीटर घटकर 67.86
रुपए लीटर होगा। मुंबई में वैट सहित पेट्रोल का दाम 68 पैसे घटकर 75.73 रुपए लीटर रह जाएगा। इससे
पहले 31 अगस्त को पेट्रोल के दाम
में 1.50 रुपए लीटर कटौती की गई
थी। दिल्ली में वैट सहित यह कटौती 1.82
रुपए लीटर रही।
ये
खबर आपके लिए खुशखबरी लेकर आई है। बढ़ती महंगाई में आपको थोड़ी राहत देने वाली खबर
है। जी हां अब तक जिस पेट्रोल की कीमतों की बढ़ोतरी की खबरें पढ़ते आ रहे है अब उसी
पेट्रोल की कीमत घट गई है। लेकिन डीजल के दाम में पिछले पांच साल में पहली बार संभावित
कटौती को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लौटने तक रोक दिया गया है।
देश
की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कारपोरेशन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम
घटने से पेट्रोल की कीमत घटाई गई है। यह कटौती यदि होती है तो जनवरी 2009 के बाद पहली बार डीजल
के दाम कम होंगे। केन्द्र सरकार ने इससे पहले जनवरी, 2013 में डीजल के दाम में हर
महीने 40 से 50 पैसे लीटर की वृद्धि का
फैसला किया था। मंत्रिमंडल के इस फैसले को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय को लगता है
कि वह अपने स्तर पर डीजल के मामले निर्णय नहीं कर सकता।
पेट्रोल
के दाम नियंत्रणमुक्त हैं इसलिए इसमें सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय
बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम नीचे आने के साथ ही डीजल के दाम में होने वाला
नुकसान कम हुआ है और 16 सितंबर को तो इसमें 35 पैसे का लाभ होने लगा
था। इस समय डीजल का दाम उसकी लागत से एक रुपया उंचा है।
पेट्रोलियम
मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने,
समझा जाता है कि इस बारे
में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। मंत्रालय ने चुनाव आयोग को भी लिखा है और महाराष्ट्र
तथा हरियाणा में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर दाम घटाने को लेकर आयोग की अनुमति मांगी
है।
सूत्रों
के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि 17
जनवरी,
2013 को
मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने डीजल के दाम में नुकसान को समाप्त करने
के लिए हर महीने 40-50 पैसे वृद्धि का फैसला
किया था। तब यह अनुमान नहीं था कि इसमें लागत से अधिक वसूली भी हो सकती है।
मंत्रालय
का कहना है कि वह डीजल के दाम में कटौती करना चाहता है ताकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल
कंपनियों के बाजार हिस्से को बरकरार रखा जा सके। क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में निजी
क्षेत्र की कंपनियां सस्ते में डीजल बेचकर बाजार हिस्से पर काबिज हो सकती हैं।

डीजल
के दाम में इससे पहले 29
जनवरी 2009 को 2 रुपए
की कटौती की गई थी। नई कटौती यदि होती है तो यह 5 साल
में पहली बार होगी।

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