इंटरनेट की वैश्विक संधि पर 89 देश राजी

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संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय टेलिकम्यूनिकेशंस यूनियन आईटीयू के 193 सदस्य 24 साल पुरानी संधि के संशोधन में सहमति की उम्मीद कर रहे थे. जब यह संधि हुई थी, उस समय इंटरनेट शुरुआती दौर में था. लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों के विरोध के कारण 12 दिनों के सम्मेलन में सहमति नहीं हो पाई जबकि रूस, चीन और विकासशील देश इंटरनेट प्रशासन में अधिक समानता की मांग कर रहे थे. अमेरिका का कहना था कि यह संधि सरकारों को यूजरों की सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट पर नियंत्रण के लिए बहुत ज्यादा अधिकार देती है.
अमेरिका ने बैश्विक संधि के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को संधि के जरिए इंटरनेट प्रशासन या उसमें छप रही चीजों के बारे में फैसला नहीं लेना चाहिए. दुबई में अमेरिकी टीम के प्रमुख टेरी क्रेमर ने कहा कि इंटरनेट पर नियंत्रण को बढ़ाने के पक्ष में उनका देश नहीं है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय टेलिकम्यूनिकेशंस यूनियन ने संधि में जो लिखा है उसे पढ़ कर ऐसा लगता है जैसे कि इंटरनेट पर सरकारी नियंत्रण को लाने की कोशिश की जा रही हो.
अमेरिका के अलावा कई पश्चिमी देशों ने भी कहा है कि इस संधि से संयुक्त राष्ट्र और बाकी अधिकारियों को बहुत ज्यादा ताकत मिल जाएगी. संधि को लेकर आपत्ति जताने वाले देशों में ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं.
शुक्रवार को कई देश संधि पर हस्ताक्षर करेंगे लेकिन कुछ अधिकारियों का मानना है कि इसे कार्यान्वित करने में परेशानी आएगी. साथ ही तकनीकी विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस समझौते का न होना अच्छा होता क्योंकि इस समझौते से इंटरनेट पर सरकार का नियंत्रण बढ़ने का खतरा है. लेकिन अगर समझौता नहीं होता है तो अलग अलग देशों में इंटरनेट अलग तरह से काम करेगा. रूस के टेलिकॉम मंत्रालय के अधिकारी आंद्रे मुखानोव कहते हैं, “शायद भविष्य में इंटरनेट कुछ बिखरा सा हो. यह हम सब के लिए नुकसान करेगा और मैं उम्मीद करता हूं कि हमारे अमेरिकी और यूरोपीय साथी इस बात को समझेंगे.”
वहीं अमेरिकी और कुछ यूरोपीय देशों का कहना है कि वह समझौते का एक मॉडेल चाहते हैं जिसमें निजी उद्योग भी इंटरनेट के मानक तय करें और उसे विकसित करने में मदद करें. अमेरिकी अधिकारी क्रेमर का कहना है कि उनके देश को खास तौर से स्पैम ईमेल के नियंत्रण से आपत्ति है जिसमें बेकार संदेशों के अलावा राजनीतिक या धार्मिक ईमेल की छानबीन हो सकेगी. साथ ही समझौते में वेबसाइट एड्रेस के प्रशासन के अधिकार सरकारों को देने की बात थी लेकिन अमेरिका के कहने पर इसे समझौते से हटा दिया गया.
अमेरिका सहित ज्यादातर यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों का कहना है कि वह अपनी सरकारों से बात करने के बाद ही समझौते पर कोई फैसला ले सकते हैं. ब्रिटेन के साइमन टाउलर ने कहा कि इंटरनेट पर इस वक्त कोई संधि नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसकी भाषा से इंटरनेट और उसकी सामग्री से संबंधित विवाद के रास्ते खुलते हैं.

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