अमेरिका के जिज्ञासु अहमद

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अमेरिका के टेक्सास राज्य में रहने वाला अहमद मोहम्मद इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।14 वर्षीय किशोर अहमद को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ह्वाइट हाउस आने का न्योता दिया है। फेस बुक के सीईओ मार्क जुकेरबर्ग ने भी उससे मिलने की इच्छा जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिटंन ने उसे प्रेरित करते हुए जिज्ञासु बने रहने की सलाह दी है। नासा के एक इंजीनियर ने कहा है कि अहमद उसे दो साल बाद कॉल करे क्योंकि उसके जैसे जिज्ञासुओं की नासा को जरुरत है। पूरे विश्‍व से अहमद के समर्थन और प्रोत्साहन के संदेश आ रहे हैं।…और यह सब हुआ है पिछले चार-पॉंच दिनों में।
साधारण सी लगने वाली एक असाधारण घटना ने अहमद को यह वैश्‍विक उछाल दी है। घटना इरविंग शहर की है जहॉं अहमद मैक ऑर्थर हाई स्कूल में पढ़ता है। आधुनिक तकनीक में उसकी रुचि है। वह अपने खाली समय में घर में भी कुछ-कुछ प्रयोगधर्मा काम करता रहता है। इसी रुचि के कारण उसने एक डिजिटल-घड़ी,सर्किटों के सहयोग और विद्युत के तारों के संजाल से एक ब्रीफकेस में बनाई और अतिउत्साह में इसे अपने विज्ञान के शिक्षक को दिखाने के लिए स्कूल ले गया। विज्ञान शिक्षक ने उसके इस निर्माण को सराहा और स्कूल में किसी और को न दिखाने की चेतावनी दी। किन्तु अंग्रेजी क ी कक्षा में उस घड़ी से ’बिप’ जैसी ध्वनि आई और शिक्षिका ने उसकी तलाशी ली। शिक्षिका को लगा कि यह ब्रीफकेस जैसी चीज बम हो सकती है। अहमद को प्राचार्य के सामने पेश किया गया। प्राचार्य ने पुलिस को बुला लिया और पुलिस अहमद को बाल सुधार गृह में ले ग़ई जहॉं उससे तीन दिनों तक गहन पूछताछ होती रही। इस बीच उसकी गिरफ्तारी की घटना, कारण सहित सोशल मीडिया पर वायरल हुई। दुनिया भर से अहमद के समर्थन में आवाजें उठने लगीं। ओबामा सहित अगली पॉंत के लोग उसके समर्थन में बोलने लगे। अहमद पुलिस गिरफ्त से बाहर आया। 
यही है अहमद के रातों रात मीडिया का हीरो बन जाने की दास्तान। मगर, इस दास्तान में पैवस्त है असहजता-असामान्यता की एक दूसरी दास्तान भी, जिस पर बहस का सिलसिला चल रहा है कि क्या अमेरिका में ट्वीन-टावर उड़ाये जाने की दहशत अब-तक बरकरार है? ओसामा बिन लादेन के खात्मे के बाद भी हर दाढ़ी वाले शख्स में उन्हें ओसामा नजर आता है। अमेरिका में ऐसी अनेक घटनाएँ घटित हो चुकी हैं जिनमें किसी सिख को मुसलमान समझ कर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। इन घटनाओं से अमेरिका में रहने वाले मुसलमान असुरक्षा की भावना का शिकार हो रहे हैं। 
अहमद के साथ जो कुछ भी हुआ वह अमेरिकी पुलिस की कार्यप्रणाली की खामियों को भी उजागर करता है। किन्तु ओबामा द्वारा अहमद के लिए किए गए ट्वीट से यह भी पता चलता है कि अमेरिका खुद को महान राष्ट्र बताने में क्यों नहीं हिचकता? अपने इस ट्वीट से ओबामा ने अमेरिका को वैश्‍विक आलोचना का शिकार होने से बचा लिया। भले ही इस पूरे प्रसंग को एक साधारण घटना निरुपित करने में अमेरिका सफल हो जाए मगर यह हकीकत है कि इस घटना ने मुसलमानों के प्रति आम अमेरिकियों के नफरत और अविश्‍वास को उजागर कर दिया है। 
महज अहमद नाम होने से ही वहॉं एक मासूम सा किशोर दहशतगर्द समझ लिया जाता है और बिना पुख्ता जॉंच के ही उसे मानसिक यंत्रणा का शिकार होना पड़ता है। अमेरिकियों को समझना होगा कि आम मुसलमान उग्रवादी नहीं है। इस्लामी स्टेट की अवधारणा से भी उसका सीधा सरोकार नहीं है। वह तो महज आम इंसान है।

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