पत्रकारो पर लगी राजनीति नज़र

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देश में जहा लोगो की शुरुआत पत्रकार द्वारा किये मेहनत से होती है अर्थात मीडिया द्वारा अख़बार के माध्यम से देश की जनता को उनके अधिकार , सामाजिक घटना चक्र , के साथ साथ देश में फैले भ्रष्टाचार का उजागर करती है | जिस पर जनता फिर अपनी कहानी लिखती है |

परन्तु वर्तमान समय में जिस तरह से पत्रकारो पर हमले हो रहे है यह देश के लिए अच्छा संकेत नही है | बिहार में जिस तरह से सारेआम पत्रकार रंजन की गोली मार कर हत्या हो जाती है यह समझने के लिए काफी है की आखिर पत्रकारो की हत्या, राजनीति और राजनीतिक दोनों पर सुई क्यों रुक जाती है |

पत्रकारो पर हुए हमले और हत्याओ की फाईल सौ प्रतिशत में से 8 प्रतिशत ही पूर्ण हुई है इसके अतिरिक्त बचे सभी मामले आज भी इंसाफ की राह देख रही है | कही न कही इसका कारण राजनीति संरक्षण तो नही | इसमें कोई गुरेज नही की कही न कही राजनेताओ का सह पत्रकारो पर हावी रहता है |

देश की मीडिया संगठन इस पर एकता पूर्वक आवाज उठाएं जिससे मर रही पत्रकारिता पर साँसे आ सके | साथ ही साथ ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकारो पर हो रहे हमले को निष्क्रिय करना है तो सुरक्षा मुहैया का सक्रिय पहल हमेशा आगे रहना चाहिए |

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