बिहार के सिकंदर ने बंजर पहाड़ को बनाया हरा-भरा

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र्यावरण को बचाने और उसे संरक्षित करने की बातें तो आमतौर पर रोजना सुनने को मिलती है लेकिन बंजर पहाड़ को हरा-भरा बनाने की कवायद कुछ बिरले ही कर पाते हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है गया के सिकंदर ने।
पहाड़ तोड़ने की खबरें तो आपने जरूर सुनी होगी लेकिन आज हम आपको बताने वाले है पहाड़ को हरा-भरा करने की एक गुड न्यूज।

बिहार के गया जिले के सिकंदर ने पिछले 34 वर्षों से बंजर ब्रह्मयोनि पर्वत और उसके तराई क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण की मुहिम चलाई हुई है।

सिकंदर की यह मुहिम तब शुरू हुई जब आस-पास के लोगों ने उन्हें एक प्रसिद्ध कहावत का सहारा लेकर ताना दिया और उनके सामने बंजर पर्वत को हरा भरा करने की चुनौती दे डाली। बस फिर क्या था सिकंदर ने चुनौती को स्वीकार किया और 12 फरवरी 1982 के दिन इसे अंजाम देने में जुट गये।

तब से अब तक उन्होने एक लाख से अधिक विभिन्न प्रकार के छायादार, फलदार पौधारोपण कर बंजर पहाड़ को हरियाली में तब्दील कर दिया है। सिकंदर ने बिना किसी सहायता के इस महान काम को अंजाम दिया है। खुद पानी लेकर पहाड़ पर जाते और पौधों को पानी देते हैं। अब आस पास के लोग भी उनके इस काम का लोहा मानते है।

सिकंदर को तो अब लोग पर्यावरण पुरूष कहने लगे है। पर्यावरण पुरुष कहते है कि हरियाली ही उनके लिए पर्व-त्योहार है और यही उनकी पूजा है। इसमें जो आनंद है वह उन्हें कहीं नहीं मिलती। बंजर भूमि को खेती के लायक बनाने की बात तो सुनने को मिलती है लेकिन बंजर पहाड़ को हरियाली में तब्दील करने का जो काम सिकंदर ने किया है वह अपने आप में मिसाल है।

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