'राइट टु रिकॉल' से वोटरों ने पलटा पार्षदों का फैसला

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जयपुर।। देश में ‘राइट टु रिकॉल’के पहले मामले में वोटरों ने नगरपालिका अध्यक्ष को पद से हटाने के पार्षदों के फैसले को पलट दिया। राजस्थान के बारां जिले की मांगरोल नगर पालिका के कांग्रेस और बीजेपी के पार्षदों ने पालिका अध्यक्ष अशोक जैन को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। बुधवार को जब इस प्रस्ताव पर ‘राइट टु रिकॉल’ के तहत वोटिंग हुई तो, वोटरों ने जैन की कुर्सी बहाल रखी।
गौरतलब है कि जैन नवंबर 2009 में हुए लोकल बॉडी इलेक्शन में स्वतंत्र उम्मीदवार थे और उनकी जीत के बाद उन्हें चेयरमैन बनाया गया था। ईमानदार छवि के जैन केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ के संस्थापक सदस्यों में से हैं। मंगरौल नगर निगम में 20 पार्षद हैं जिनमें से 11 कांग्रेस, 5 बीजेपी और 4 स्वतंत्र हैं। जैन को पद से हटाने के लिए 20 में से 17 पार्षदों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के तहत वोट किया था। जैन ने इस प्रस्ताव को कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि उन्हें जनता ने चुना है तो जनता ही हटा सकती है। कोर्ट के आदेश पर राइट टु रिकॉल की व्यवस्था की गई थी।
निर्वाचन अधिकारी व मांगरोल के उप जिला कलेक्टर दारा सिंह मीणा ने बताया कि वोटिंग में खाली कुर्सी के पक्ष में 3,755 और कुर्सी पर बैठे व्यक्ति के पक्ष में 7,243 वोट पड़े हैं। उन्होंने कहा कि जनमत में मांगरोल नगर पालिका के 17 पार्षदों ने अध्यक्ष अशोक जैन के खिलाफ 12 जनवरी को 17 के मुकाबले तीन से पारित प्रस्ताव को तीन हजार 488 मतों से निरस्त कर दिया है।
मीणा के अनुसार जनमत परिणाम के बाद मांगरोल नगर पालिका की अध्यक्ष की कुर्सी पर अशोक जैन काबिज रहे। उन्होंने कहा कि यह वोटिंग राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 53 में रिकॉल ऑफ चेयरमैन नियम 2012 के तहत 12 दिसंबर को हुआ था, जिसमें 16,735 वोटर्स में से 10,998 ने वोट डाला।

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