ईरान परमाणु संधि के बिना मध्यपूर्व में युद्ध का खतरा: ओबामा

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वाशिंगटन। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिपब्लिकन नियंत्रण वाली कांग्रेस से पिछले सप्ताह हुई ईरान परमाणु संधि को मंजूरी देने की अपील करते हुए आज कहा कि इस संधि के अभाव में मध्यपूर्व में युद्ध का खतरा बना हुआ है। ओबामा ने पिट्सबर्ग में विदेश मामलों के वरिष्ठ कर्मियों को दिए अपने संबोधन में कहा कि इस संधि के जरिए, हमारे पास ईरान की चुनौती को हल करने का मौका है, जो शांतिपूर्ण ढंग से परमाणु हथियार जुटाने की कोशिश कर रहा है। इसके बिना मध्यपूर्व में एक और संघर्ष होने का खतरा है।उन्होंने कहा कि इस संधि पर जारी बहस में हम कुछ ऐसी नीतियों और सोच से जुड़ी आवाजें सुन रहे हैं, जो बीते दौर में विफल रही थीं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कूटनीतिक हल की संभावना बड़ी तेजी के साथ खारिज करने वाले कुछ नेता और पंडित वही लोग थे, जो इराक में युद्ध करने के लिए आनन-फानन में तैयार हो गए थे और कहा था कि इसमें कुछ ही माह लगेंगे। ओबामा ने तर्क देते हुए कहा कि इस विकल्प के परिणाम हम जानते हैं कि इसके लिए हमें जान और माल की क्या कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए मेरा मानना है कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के संरक्षण के लिए यह कहीं बेहतर व जिम्मेदार तरीका है और हम यही कर रहे हैं। ओबामा ने कहा कि एक साझा खतरे का सामना करने के लिए हमने शेष विश्व को खारिज करने के बजाय और पूरी तरह अकेले चलने के बजाय अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट करने का कठिन एवं धैर्य वाला काम किया है। उन्होंने कहा, ‘हमारे परामर्शदाताओं से बात सुनने तक से इंकार कर देने वाली सीनाजोरी कई बार सुनने में तो अच्छी लग सकती है लेकिन इससे हासिल कुछ नहीं होता। इसकी जगह हम इस बात पर गौर कर रहे हैं कि मजबूत और सैद्धांतिक कूटनीति किसी समस्या को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के लिए एक उम्मीद दे सकती है।’ उल्लेखनीय है कि कल व्हाइट हाउस ने ‘द ईरान डील’ नाम से एक ट्विटर हैंडल शुरू किया, जो लोगों को इससे जोड़ने और संधि के बारे में मौजूद गलत धारणाओं को ठीक करने के लिए है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जोश अर्नस्ट ने कहा कि यह तथ्य उपलब्ध करवाएगा, ऑनलाइन लोगों को जोड़ेगा आर इसे समझौते में शामिल लोगों द्वारा एक मंच के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

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