महाराष्ट्र में जारी है भ्रूण हत्या

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मुंबई। आज पूरी दुनिया नारी शक्ति को सलाम कर रही है, लेकिन हमारे देश में एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो बेटियों की जान का दुश्मन है। बेटे की चाह में आज भी धड़ल्ले से बेटियों का कोख में ही कत्ल किया जा रहा है। महाराष्ट्र के कई शहरों में लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या के मामले सामने आए हैं। जिसके बाद राज्य की मेडिकल काउंसिल ने 21 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है।
महिला दिवस के मौके पर पूरा विश्व महिला सशक्तिकरण की दुहाई दे रहा है, लेकिन महाराष्ट्र में भ्रूण हत्या से जुड़े आंकड़ें महिलाओं को मजबूत बनाने के दावों को खोखला साबित कर रहे हैं। महाराष्ट्र के 9 जिलों में 21 डॉक्टरों को भ्रूण हत्या और लिंग परीक्षण के मामले में सस्पेंड किया गया है। ये खुलासा राज्य की मेडिकल काउंसिल ने किया है।
लेकिन इसके बावजूद महाराष्ट्र के कई जिलों में आज भी धड़ल्ले से भ्रूण हत्या का सिलसिला जारी है। मेडिकल काउंसिल की स्पेशल टीम की जांच में ये बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या के मामले में सरकारी डॉक्टर भी शामिल हैं। रिपोर्ट आने के बाद महाराष्ट्र के 45 डॉक्टर जांच के दायरे में हैं। वर्धा,यवतमाल, बीड, पुणे, जलगांव, अहमदनगर, सांगली, सातारा और सोलापुर जैसे शहरों में जैसे जैसे जांच बढ़ रही है। तमाम सफेदपोश चेहरों पर से नकाब हट रहा है। जून 2012 के अंत तक स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी के बाद 400 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील कर दिया था। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल अध्यक्ष डॉ. ताओरी के मुताबिक 21 डॉक्टर को निवलंबित किया जा चुका है। राजयभर में जोरों पर कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
महाराष्ट्र में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के गिरते अनुपात से जाहिर है कि सरकार देर से जागी है। सरकार कोख के कातिलों की धरपकड़ के लिए पूरी ताकत लगा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हर जिले में हेल्पलाइन, इंटेलिजेंस के जरिए डॉक्टरों की निगरानी करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कोख के कातिलों का रैकेट इतना बड़ा है कि सरकार की तमाम कोशिशें अब तक नाकाफी साबित हुई हैं।
स्वास्थ्य मंत्री सुरेश शेट्टी के मुताबिक सरकारी डॉक्टर भी लिप्त है। हम कन्या भ्रूण हत्या और लिंग परीक्षण मामले में 45 डॉक्टरों पर कार्रवाई कर चुके है। राज्य सरकार कुछ डॉक्टरों पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रही है लेकिन कन्या भ्रूण हत्या और लिंग परीक्षण के जरिए मासूमों की जान लेने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। ये वो लोग हैं जिन्हें ना तो समाज का डर है और ना ही कानून की परवाह।

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