नियमित टीकाकरण से ही भारत पोलियो मुक्‍त हो पाया

0
17
सरिता बरारा

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद जिले के भैसियां गांव में अप्रैल के अंतिम सप्ताह के दौरान नियमित रूप से आयोजित होने वाले टीकाकरण अभियान से एक दिन पहले 20 वर्ष की मुस्लिम महिला नूरजहां गांव की आंगनवाड़ी में युवा माताओं के साथ बैठक कर रही हैं। समुदाय से जुड़े होने के नाते नूरजहां माताओं के साथ आसानी से संवाद कायम कर लेती हैं। आज उनका जोर नवजात शिशुओं और पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण की महत्ता पर है। नूरजहां अधिक साफ-सफाई पर भी जोर देती हैं। माताएँ अपनी गोद में बच्चे लिए ध्यान से नूरजहां की बातें सुनती हैं। बाद में पूछे जाने पर निरक्षर और अर्ध साक्षर माताएं विश्वासपूर्वक यह बताती हैं कि टीकाकरण क्यों जरूरी है, नवजातों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए इसका क्या महत्व है। नूरजहां पहले पल्स पोलियो अभियान में स्वयंसेवी के रूप में काम करती थीं और बाद में उन्हें कम्यूनिटी मोबिलाइजेशन को-ऑर्डिनेटर (सीएमसी) बनाया गया है।

वर्ष 2001 में पोलियो अभियान के लिए यूनिसेफ के सहायता कार्यक्रम के तहत लगभग 5000 सीएमसी को राज्य सरकार के स्वास्थ्य कर्मियों तथा अन्य हितधारकों के साथ 7000 अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया। अब समर्पित कार्यकर्ताओं के इस नेटवर्क को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के लिए बरकरार रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र की यह संस्था नियमित टीकाकरण के स्तर को बढ़ाकर तथा अग्रणी स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों को व्यापक तरीके से प्रशिक्षित कर शिशुओं को होने वाली सामान्य बीमारियों की पहचान और निदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को समर्थन दे रही है।
 2006 में पोलियो के उभरने के समय मुरादाबाद इसका केन्द्र था। लेकिन टीकाकरण की आक्रामक रणनीति से वहां सिर्फ टाइप वन किस्‍म का एक पोलियो का मामला सामने आया। अब तो पूरा भारत पोलियो मुक्त घोषित हो चुका है। महत्वपूर्ण यह है कि 2010-2011 के दौरान 12 से 23 महीने की आयु वर्ग में केवल 24.1 प्रतिशत बच्चों का ही पूर्ण टीकाकरण किया जा सका। मुरादाबाद के जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. आर.के.शर्मा बताते हैं कि इस समय कवरेज बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई है। वास्तव में यह पूरे उत्तर प्रदेश के मुकाबले एक प्रतिशत अधिक है। यहां शिशु मृत्युदर भी गिरकर प्रति 1000 शिशुओं में 52 रह गई है।
मुरादाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव यादव कहते हैं कि भारत के पोलियो मुक्त होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती टीकाकरण कार्यक्रम की गति को बनाए रखने की है क्योंकि विश्व को अभी भी उभरने वाली बीमारियों से मुक्त होना है। पोलियो वायरस इस समय पाकिस्तान,
अफगानिस्तान
और नाइजीरिया में महामारी का रूप धारण कर चुके हैं लेकिन पाकिस्तान में पोलियो की खुराक पिलाने वाले लोगों पर हुए हमले के बाद इसके सीमा पार कर भारत में भी फैलने का खतरा बढ़़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार पाकिस्तान, सीरिया तथा कैमरून ने हाल ही में पोलियो वायरस को अफगानिस्तान, इराक और भूमध्यवर्ती गिनी में फैलाने में सहयोग दिया है।
डॉ यादव का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मचारी अन्य हितधारकों के साथ किसी तरह की सुस्ती नहीं बरत सकते। उनका कहना है कि खसरा, डिप्थीरिया, टिटनेस तथा टी.बी. जैसी बीमारियों को रोकने के लिए उसी उत्साह से टीकाकरण कार्यक्रम चलाना होगा जिस उत्साह से पल्स पोलियो अभियान में चलाया गया। उन्होंने बताया कि बाहर से आकर बसने वाले लोगों के क्षेत्रों तथा अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाते हैं।
डॉक्टर संजीव यादव कहते हैं कि नियमित टीकाकरण को उसी उत्साह के साथ जारी रखने की जरूरत है जिस उत्साह के साथ पल्स पोलियो अभियान शुरू किया गया था।

LEAVE A REPLY