शिवसेना- बीजेपी गठबंधन में टूट से राज को सकता है फायदा

11
मुंबई. महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन टूटने का राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को फायदा मिल सकता है। 2009 के विधानसभा चुनाव में एमएनएस ने शिवसेना और बीजेपी को 40 सीटों पर काफी नुकसान पहुंचाया था और इन निर्वाचन क्षेत्रों करीब 5 फीसदी वोट हासिल किए थे। पिछले हफ्ते बीजेपी नेता एकनाथ खड़से ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा था, ‘हमारा विश्लेषण बताता है कि पिछले चुनाव में हमें 41 सीटें इसलिए गंवानी पड़ी क्योंकि शिवसेना और एमएनस के बीच वोटों का बंटवारा हो हुआ।’ 
उत्तरी महाराष्ट्र में राज ठाकरे का मजबूत जनाधार है। खासकर नासिक और अन्य इंडस्ट्रियल शहरों में वह पैठ बनाने में कामयाब हुए हैं। पुणे में पिछले म्यूनिसिपल इलेक्शन में उन्हें जीत भी मिली है, जहां सीटों के मामले में उन्होंने बीजेपी को भी पीछे छोड़ दिया। टोल टैक्स के खिलाफ चलाए गए आंदोलन के कारण औरंगाबाद और कोल्हापुर जैसे शहरी इलाकों में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। 
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्य में असल लड़ाई शिवसेना बनाम राकांपा की हो सकती है। भाजपा-शिवसेना के वोट बंटेंगे जो राकांपा के पास जा सकते हैं। शहरों में भाजपा फायदे में रह सकती है लेकिन गांवों में शिवसेना। ऐसे में चार बड़े दलों की लड़ाई में राज ठाकरे की पार्टी फायदा उठा सकती है। 
एमएनएस के एक नेता का कहना है, ‘हमारा मानना है कि वोटर राज ठाकरे को बालासाहेब के परिवार के परिवार के हिस्से के तौर देखते हैं। वह बालासाहेब की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और यह हमारे लिए काफी अहम बात हैं। एनएनएस कई पार्टियों के वोट काट सकती है लेकिन यह भी सच है कि हमें शिवसेना के परंपरागत वोटों से बड़ा खतरा है।’
कांग्रेस के एक नेता कहते हैं, ‘इस बार के चुनाव में चार बड़ी पार्टियां अलग-अलग खड़ी हैं ऐसे में एमएनस खुद को पांचवी पार्टी के तौर पर स्थापित कर सकती है। हालांकि वह किसी बड़ी पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे। 2009 के चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी ने अप्रत्यक्ष तौर पर राज ठाकरे को प्रोत्साहित किया था क्योंकि हम जानते थे कि वह शिवसेना के ही वोट काटेंगे। लेकिन इस बार हम ऐसा नहीं करने वाले हैं क्योंकि गठबंधन टूट गया है।’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here