भ्रष्टाचार के मामले में जयललिता दोषी करार, अब देना होगा इस्तीफा

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बेंगलुरु
: 18 साल पुराने आय से अधिक
सम्पति के मामले में तमिलनाडु की सीएम जयललिता को बेंग्लुरु की विशेष सीबीआई अदालत
ने दोषी करार दिया है. सजा का एलान दोपहर 3
बजे किया जाएगा, जिसमे
1 से 7 साल तक की सजा हो सकती है. अदालत से दोषी करार
देने के बाद अब उन्हें सीएम के पद से इस्तीफा देना होगा और उनकी विधानसभा सदस्यता भी
खत्म हो जाएगी. सजा की घोषणा के बाद अगले 6
सालों तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाएगी. इस फैसले के बाद सत्तारूढ़
एआईएडीएमके समर्थक गहरे सदमे में हैं। महिलाओं को जयललिता के आवास के बाहर रोते-बिलखते
देखा गया। इस बीच गुस्साए एआईएडीएमके समर्थकों ने हंगामा भी शुरू कर दिया है। डीएमके
चीफ करुणानिधि के घर पर भी पथराव किए जाने की खबर है।
जयललिता
पर 1991-96 में पहली बार मुख्यमंत्री
बनने के बाद से आय के ज्ञात स्रोतों से 66
करोड़ रुपए अधिक संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप है. जयललिता की निकट
सहयोगी शशिकला नटराजन,
उनकी रिश्तेदार इलावरासी, उनके भतीजे और जयललिता द्वारा बेदखल किए
जा चुके उनके गोद लिए गए बेटे सुधाकरन समेत अन्य इस मामले में आरोपी हैं. जयललिता के
खिलाफ यह मुकदमा बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दाखिल किया था.
मामले
में कब क्या हुआ
14 जून 1996: डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने जयललिता के खिलाफ
शिकायत दर्ज कराई.
21 जून 1996: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उनकी
शिकायत पर जांच के लिए आईपीएस लेतिका सरन को निर्देश दिया
18 जून 1996: तत्कालीन द्रमुक सरकार ने कथित तौर पर बेहिसाब
संपत्ति रखने के लिए जयललिता के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करने के लिए डीवीएसी को निर्देश
दिए.
4 जून 1997: चेन्नई में आरोप पत्र दायर; 66.65 करोड़ रुपये की आय से अधिक
संपत्ति का आरोप
21 अक्टूबर 1997: कोर्ट ने जयललिता, शशिकला, सुधाकरण
और इलावर्सी के खिलाफ आरोप तय किए
मार्च
2002: सीएम के रूप में जयललिता ने संभाला कार्यभार
नवंबर
2002 से फरवरी 2003 तक करीब 76 गवाह अपने पिछले दिए बयानों
से मुकर गए.
28 फरवरी, 2003: द्रमुक नेता अनबाझगन ने मामले को स्थानांतरण
के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली.
18 नवंबर 2003: सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश पर मामला
बंगलौर की विशेष अदालत को सौंप दिया गया.
मार्च
2005 दिसम्बर 2003: स्पेशल कोर्ट ने मामले के लिए बंगलौर के
बीवी आचार्य को पब्लिक प्रॉसीक्यूटर के तौर पर नामित किया.
22 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट
ने जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया.
2010-2011
: गवाहों से फिर हुई पूछताछ
16 मई 2011: अन्नाद्रमुक के वापस सत्ता में आने पर जयललिता
फिर से राज्य की सीएम बनीं.
20 अक्टूबर एवं 21, 22 और 23 नवंबर को जयललिता ने कोर्ट
में पेश होकर सवालों के जवाब दिए.
13 अगस्त 2012: जी भवानी सिंह की स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर
के रूप में नियुक्ति की गई.
23 अगस्त 2012: द्रमुक नेता ने एसपीपी की नियुक्ति को लेकर
सवाल उठाए.
26 अगस्त: कर्नाटक सरकार
ने एसपीपी को मामले से हटाया.
अगस्त-सितम्बर
2012: मामले से हटाए गए एसपीपी ने ली कोर्ट की
शरण, दोबारा एसपीपी नियुक्त
30 सितंबर 2012: विशेष न्यायालय के न्यायाधीश बालकृष्ण सेवानिवृत्त
हुए.
29 अक्टूबर 2012: उच्च न्यायालय ने स्पेशल कोर्ट के जज के
रूप में जॉन माइकल कुन्हा की नियुक्ति की.
28 अगस्त 2014: मामले में सुनवाई खत्म हुई. फैसले को सुरक्षित
रखते हुए इसको घोषित करने के लिए 20 सितंबर की तारीख तय की
गई.
15 सितंबर 2014: जयललिता ने सुरक्षा कारण बताकर स्थान परिवर्तन
का अनुरोध किया.

16 सितंबर 2014: स्पेशल
कोर्ट ने जयललिता की दलील स्वीकारते हुए स्थान में तबादला किया और फैसले की घोषणा के
लिए 27 सितंबर तय और कोर्ट ने दोषी करार दिया.

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