जापान की सुरक्षा समीक्षा रिपोर्ट पर चीन हुआ आगबबूला

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बीजिंग। पिछले काफी वर्षों से तल्ख और अविश्वास भरे द्विपक्षीय रिश्तों को साझा करने वाले पड़ोसी जापान व चीन के बीच उस वक़्त मतभेद और बढ़ गए जब जापान की वार्षिक सुरक्षा समीक्षा रिपोर्ट में चीन के प्रति चिंता प्रकट की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चीन द्वारा जापान से सटे समुद्री क्षेत्र में गॅस व तेल के उत्खनन प्रक्रिया के चलते जापान की हिस्सेदारी वाली प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होगा। मंगलवार को सुरक्षा की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी किया गया जिसे प्रधानमंत्री शिंजों आबे समेत मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले भी एक रिपोर्ट आई थी लेकिन उनकी पार्टी ने उसे अस्वीकार करते हुए कहा था कि इसमें चीन के वृद्ध सख्त स्टैंड नहीं लिया गया है। इस श्वेत पत्र के जारी होते ही चीन के रक्षा मंत्रालय ने जापान के इस कदम का पुरजोर विरोध किया और कहा कि इस तरह की रिपोर्ट जापान के विदेश नीति के दोमुंहे बर्ताव को दर्शाती है और इससे पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में अशांति और अस्थिरता का वातावरण उत्पन्न हो सकता है। जापान ने चीन को आगाह करते हुए कहा था कि पूर्वी चीन सागर में उसे जल्द से जल्द तेल व गॅस स्टेशन का निर्माण बंद कर देना चाहिए जिसपर चीन ने कहा कि इस श्वेत पत्र की बारीकी से अध्ययन करने के पश्चात वे इस का उचित जवाब देंगे क्योंकि चीन इसका हक़ रखता है। इससे पहले भी पिछले हफ्ते जापान के प्रधानमंत्री ने एक कानून पारित करवाते हुए अपनी फौज को यह अनुमति दे दी कि यदि जरूरत पड़े तो जापान से बाहर जाकर भी अपने साथी फ़ौजियों के साथ मिलकर देश के खतरे से निपटें। जापान ने ऐसा बड़ा कदम पिछले सात दशकों में पहली बार उठाया है। अमेरिका के साथ भी जापान की संधि है कि जब भी उस पर दुश्मन सेना कोई कार्रवाई करेगी तो अमेरिका उसके बचाव में उतरेगा। ज़ाहिर है कि पिछले कुछ समय से चीन लगातार दक्षिणी चीन एवं पूर्वी चीन सागर में जापान समेत अन्य छोटे देशों के समक्ष अपनी धौंस जामाते आ रहा है और संसाधनों एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन समुद्री क्षेत्रों में कई सारे द्वीपों और इलाकों पर अपना अधिकार जाता रहा है जिससे बाकी के छोटे देश चिंतित हैं। यहाँ तक कि चीन ने इन इलाकों में हवाई पट्टियाँ और कृत्रिम टापुओं का निर्माण करना शुरू कर दिया है जिसके चलते अमेरिका भी इस विवाद में कूद पड़ा है। मंगलवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कड़े शब्दों में कहा कि जापान की 400 पन्नों वाली सुरक्षा समीक्षा रिपोर्ट में इस बात को सिरे से नकार दिया गया कि चीन अंतर्राष्ट्रीय कानून के हिसाब से अपनी सीमा के दायरे में ही कार्य कर रहा है। उन्होने आगे कहा कि जापान के साथ मतभेद वाला दियाओयू/सेनकाकु द्वीप समूह प्राचीन काल से ही चीन का हिस्सा रहे हैं और चीन इसकी सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा एवं जापान को इस मामले में झूठी आशा व सपने नहीं पालने चाहिए। जहां तक रही बात दक्षिण चीन सागर की तो जापान की भूमिका वहाँ आती ही नहीं है और इसीलिए कहानियाँ कहना बंद करे। जापान की रिपोर्ट लोगों को भ्रमित करने वाली है।

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