मुफ्त डायलिसिस में रोड़ा बनी टेक्निशियन की कमी

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जबलपुर। विक्टोरिया जिला अस्पताल में सांसद निधि से स्वीकृत दो डायलिसिस मशीनें जर्मनी से आ गई हैं। अब तक प्रबंधन यह निर्णय नहीं ले सका है कि इन मशीनों को संचालित कैसे किया जाएगा। अस्पताल में टेक्निशियन नहीं होने का हवाला देकर अब इन मशीनों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित संस्था को सौंपने की तैयारी है। एेसे में जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा नहीं मिलेगी। सांसद द्वारा तीन माह पहले अस्पताल को दो डायलिसिस यूनिट स्वीकृत की गई थीं। मशीनें जर्मनी से आ भी गई हैं। इन्हें एक-दो दिन में इन्स्टॉल किया जाना है। अभी यह है स्थिति जिला अस्पताल में अभी पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन द्वारा डायलिसिस यूनिट संचालित है। अस्पताल द्वारा इन्हें एक हॉल, पानी और बिजली की सुविधा दी जा रही है। संस्था द्वारा दो मशीनें स्थापित की गई हैं। लग रही फीस मरीज को इसके लिए संस्था द्वारा अधिकृत निजी नेफ्रोलॉजिस्ट के क्लीनिक में जाकर परामर्श लेना पड़ता है। दीनदयाल योजना के मरीजों की नि:शुल्क डायलिसिस होती है। इनकी राशि का भुगतान स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है। शेष मरीजों से 750 रुपए जांच के लिए जाते हैं। मुफ्त में होनी चाहिए प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस नि:शुल्क करने का प्रावधान है। इसके बावजूद जबलपुर में यह सुविधा पीपीपी के माध्यम से संचालित है। सरकारी डॉक्टरों को डायलिसिस और किडनी रोगियों की जांच के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। विक्टोरिया से मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. संदीप भगत को इसके लिए प्रशिक्षण दिया गया है। डायलिसिस मशीनें जर्मनी से आ गई हैं। इन्हें इन्स्टॉल किया जाना है। अभी यह निर्णय नहीं लिया गया है कि इसका संचालन कैसे किया जाएगा। संस्था का सेटअप जमा हुआ है। इस कारण दोनों मशीनें सौंपने पर विचार किया जा रहा है। डॉ. एके सिन्हा,सिविल सर्जन, विक्टोरिया

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