मुशर्रफ पर हमले के दोषी की फांसी की सजा रद्द

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व सैनिक तानाशाह परवेज मुशर्रफ पर फिदायीन हमले के आरोप में सैन्य अदालत द्वारा दो नागरिकों को सुनाई गई फांसी की सजा को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रद्द कर दिया। रावलपिंडी में दिसंबर 2003 में मुशर्रफ के काफिले पर दो बार कातिलाना हमला किया गया, लेकिन वे बच गए थे। इन हमलों में कई नागरिक और पुलिसकर्मी मारे गए थे।
सिन्हुआ के मुताबिक कई सैनिकों और नागरिकों को उन हमलों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार किया गया और सजा दी गई। सैन्य अदालत ने राणा नवीद नाम के एक नागरिक को उम्रकैद और अमीर सोहैल नाम के एक दूसरे नागरिक को 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। सेना की अपीलीय अदालत ने हालांकि जुलाई 2005 में उम्रकैद की सजा को फांसी की सजा में तब्दील कर दिया।
दोनों नागरिकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पूर्व की सुनवाई में कहा था कि सैन्य अपीलीय अदालत ने दोषी ठहराए गए लोगों को सूचित किए बगैर फैसला दिया।
सैन्य अदालत का यह कदम कानून की मान्य प्रक्रिया के मुताबिक नहीं था। अदालत ने 1 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे बुधवार को सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में जिस तरह से सैन्य अधिकारियों ने सजा बढ़ा दी उस पर हैरानी जताई थी।

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