मदन महल पहाड़ी बनेगी सिटी पार्क

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मदन महल पहाड़ी को हरा-भरा बनाने संवारने की कई योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गईं। अब वन विभाग ने इसे संवारने की कोशिश शुरू की है। योजना परवान चढ़ी तो लगभग तीन करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से पहाड़ी का कायाकल्प हो जाएगा। जबलपुर। लंबे समय से मदन महल की पहाड़ी को हरा-भरा बनाने और संवारने की कई योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गईं। अब वन विभाग ने इसे संवारने की कोशिश शुरू की है। योजना परवान चढ़ी तो लगभग तीन करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से पहाड़ी का कायाकल्प हो जाएगा। पहाड़ी को सिटी पार्क बनाया जाएगा। सब ठीक रहा तो लोग दिन-रात यहां सैर करते नजर आएंगे। राज्य वन अनुसंधान संस्थान पोलीपाथर में गुरुवार को हुई रिसर्च एडवायजरी कमेटी की बैठक में वन विभाग के पीसीसीएफ नरेन्द्र कुमार ने इस योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि इसी साल मदन महल पहाड़ी को सिटी पार्क बनाने का काम शुरू हो जाएगा। प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। ईको टूरिज्म की तर्ज पर पहाडि़यों व पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना ही उसे हरा-भरा किया जाएगा। सैर करने के रास्ते बनाए जाएंगे। लोगों के बैठने और रोशनी का भरपूर इंतजाम होगा। जुड़ेंगे कोर एरिया नरेन्द्र कुमार ने कहा कि नेशनल पार्कों के बफर जोन में पर्यटन बढ़ाएंगे ताकि कोर एरिया में पर्यटन का दबाव कम हो। ग्लोबल टाइगर फोरम की योजना बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व सीधी के कोर एरिया को जोडऩे की है। बजट आते ही यह काम शुरू होगा। पार्कों का कोर एरिया जुडऩे से बाघों को दायरा बढ़ाने में आसानी होगी। आपसी संघर्ष से बाघों की मौत के मामले कम होंगे। सर्प विशेषज्ञों को देंगे मानदेय सीसीएफ डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा, शहर में सांपों के संरक्षण और लोगों की सुरक्षा केलिए सर्प विशेषज्ञों को मानदेय दिया जाएगा। शहर के हर क्षेत्र मेंवन विभाग के अधिकृत सर्प विशेषज्ञ होंगे। 2010 में हुई थी कोशिश वर्ष 2010 में तत्कालीन संभागीय आयुक्त प्रभात पाराशर ने मदन महल की पहाडि़यों को ईको टूरिज्म का केन्द्र बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जमीन के पेंच ने मामले को अटका दिया। वहां पर वन विभाग, केंद्रीय पुरातत्व विभाग और निजी भूमि बताई जा रही है। हालांकि सीसीएफ डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मदल महल में कार्य कराने में कोई अड़चन नहीं है।

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