कुंभकर्णी नींद में सोई है मोदी सरकार : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की सरकार खुद को भले की सक्षम और कठिन
परिश्रमी करार देती हो,
लेकिन सुप्रीम कोर्ट इससे
इत्तेफाक नहीं रखती है। अदालत ने गुरूवार को केंद्र सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए
कहा कि सरकार कुंभकर्ण के जैसा व्यवहार कर रही है, जो
लंबे समय तक सोया रहता था। इतना ही नहीं अदालत ने सरकार की तुलना 19वीं सदी के कैरेक्टर रिप वैन विंकल से भी
कर दी, जो कठिन काम से जी चुराता था। एक अंग्रेजी
अखबार में छपी खबर के मुताबिक जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने
गुरूवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को फटकार लगाने के दौरान केंद्र सरकार
को भी इन दोनों विशेषणों से नवाजा। सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय
की लापरवाहियों से नाराज है। ताजा मामला एक रिपोर्ट से जुडा है, जिसे पर्यावरण मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट
के सामने पेश करना था। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को दो महीने के अंदर उत्तराखंड में
अलकनंदा और भागीरथी नदी पर चल रहे 24
हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स
के बायॉडायवर्सिटी इंपैक्ट के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। शीर्ष अदालत ने रिपोर्ट के
इंतजार में इन सभी प्रोजेक्ट्स पर रोक लगा रखी है। गुरूवार को रिपोर्ट पेश नहीं होने
पर बेंच ने सरकार से कडे लहजे में कहा, रिपोर्ट
को यहां होना चाहिए था। आप (केंद्र सरकार) कुंभकर्ण की तरह व्यवहार कर रहे हैं। हमें
समझ नहीं आ रहा कि आखिर केंद्र सरकार ने हमारे सामने रिपोर्ट पेश क्यों नहीं की. आपकी
(केंद्र) मंशा क्या है। आपको काफी समय दिया जा चुका है।

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