कुछ अनोखे ही अंदाज में ‘संस्कारधानी’ में मनाया जाएगा ‘सावन’

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जबलपुर। संस्कारधानी में सावन माह का अलग ही रौनक रहती है। सावन माह में यहां के मंदिरों और उत्सवों का अपना ही इतिहास है, जिसकी तैयारियां आज से शुरू हो गई हैं। ज्योतिषााचार्यों के अनुसार शनिवार को श्रावण नक्षत्र में आयुष्मान योग के साथ सावन माह शुरू हो रहा है, जो कि हर दृष्टि से फलदायी है। दीर्घ व स्वस्थ आयु के लिए विधि विधान से शिव पूजन करना लाभदायी होगा। हर दिन नया रूप धरेंगे महादेव स्वयं भू सिद्धपीठ गुप्तेश्वर भगवान का स्वामी मुकुंददास महाराज के सान्निध्य में शिष्यों द्वारा प्रतिदिन रुद्राभिषेक व जलाभिषेक किया जाएगा। इसके अलावा रोजाना शाम को भगवान को विविध रूपों में सजाया जाएगा। इसके अलावा 10 अगस्त सावन सोमवार के अवसर पर गुप्तेश्वर महादेव की शाही सवारी निकाली जाएगी, जो कि नगर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करते हुए प्रजा का हाल जानेगी। शहर के सभी शिव मंदिरों में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। शारदा देवी का मेला लगेगा सावन सोमवार के अवसर पर मदन महल पहाड़ी स्थित शारदा देवी के दरबार में पारंपरिक मेले का आयोजन होगा। हजारों की संख्या में चारों सोमवार को मन्नत के झंडे व चुनरियां अर्पित की जाएंगी। भक्त दूर दूर से ढोल नगाड़ों के साथ माता के दरबार पहुंचेंगे। यहां झूले, साज ओ शृंगार की दुकानों में लोगों की भीड़ उमड़ेगी। चंद्रमौलेश्वर का जलाभिषेक शहर में निकलने वाली हर कांवड़ यात्रा में कुछ ना कुछ हटकर होता है। एक कांवड़ यात्रा एेसी ही होगी जिसमें केवल नारी शक्ति मां नर्मदा के चल से मीलों पैदल चलकर भगवान शिव का अभिषेक करने मंदिर पहुंचेगी। लक्ष्मी सरोकार समिति के तत्वावधान में गुरुवार 6 अगस्त को सुबह 10 बजे ग्वारीघाट से सैकड़ों महिलाओं द्वारा कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी, जो रामपुर चौराहा स्थित भगवान चंद्रमौलेश्वर का जलाभिषेक करने ढोल ढमाकों और जयकारों के साथ पहुंचेगी। महिलाओं द्वारा निकाले जाने वाली यह दूसरी कांवड़ यात्रा होगी। 11 हजार कांवडि़ये होंगे जनाकर्षण केन्द्र संस्कार कांवड़ यात्रा में इस बाद 11 हजार से अधिक कावंडि़ये शामिल होंगे। 10 अगस्त को सुबह 7 बजे संस्कार कांवड़ यात्रा ग्वारीघाट से शुरू होगी, जिसका समापन करीब 35 किमी दूर कैलाशधाम मटामर पहाड़ी पर होगा। इसमें कांवडि़ये एक कांवड़ में मां नर्मदा का जल और दूसरे में देवमूर्ति वृक्षों को लेकर चलेंगे। जो कि पर्यावरण व नर्मदा संरक्षण का संदेश देंगे। अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा भी कांवड़ यात्राओं का आयोजन किया जाएगा।

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