छिंदवाड़ा के फैसले ने हिलाया इंदौर

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इंदौर। चुनाव पूर्व परिसीमन, आरक्षण और वार्ड संख्या में इजाफा हो गया, लेकिन अब भी इंतजार। हर तारीख पर सांसें तेज जाती हैं। फोन घनघनाने लगते हैं। दिल थामकर दिन ढलने का इंतजार होता है, लेकिन शाम तक नई तारीख के साथ मिल जाती है नई उम्मीद। अब 17 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस बीच मंगलवार को दिए जबलपुर हाई कोर्ट के फैसले ने नेताओं की सांस ऊपर-नीचे कर दी है। ये दास्तां है नगर निगम चुनाव लड़ने वाले नेताओं और कोर्ट में चल रही 29 गांव को शहर में शामिल करने की सुनवाई की। 29 गावों के शामिल होने पर नया परिसीमन हुआ। शहर में 69 से बढ़कर 85 वार्ड हो गए। यानी शहर में 16 पार्षदों के साथ इतने ही नए नेताओं का उदय। वार्ड आरक्षण भी वक्त पर हो गया और तय हो गया कि किसको कहां से लड़ना है। दावेदारों ने अपने अपने इलाके तय कर लिए। मंगलवार को जबलपुर हाई कोर्ट के फैसले ने यहां के उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दीं । कोर्ट ने जबलपुर नगर निगम व छिंदवाड़ा नगर पालिक निगम की परिसीमन प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि परिसीमन आपत्तियों पर सुनवाई का अधिकार सिर्फ राज्यपाल को है। जैसे-जैसे 29 गांव को इंदौर से जोड़ने का मसला गरमा रहा है, चुनाव लड़ने वाले दावेदारों का दिल बैठता जा रहा है। इस मसले पर अब 17 अक्टूबर को सुनवाई होगी। ऎसे में दो दिन और नेताओं को अपना दिल थामना पड़ेगा। भोजन-भंडारों के साथ कदमताल भी हो गई शुरू कई ने तो अपने इलाके में लाख-दो लाख खर्च भी कर डाले। कोई धार्मिक आयोजन करवा रहा है तो कोई भोजन-भंडारे की दावत दे चुका है। किसी को अपने आका से तैयारी का इशारा मिल गया है तो कोई आरक्षण में अपने हिसाब का वार्ड आने मात्र से टिकट जेब में मानकर चल रहा है। ऎसे में अगर कोर्ट का फैसला विपरीत आ जाता है तो? यह सवाल इन दावेदारों को न दिन में चैन से रहने दे रहा है और रात में नींद आने दे रहा है। वे दावेदार तो बुरी तरह डरे हुए हैं जिनका वार्ड उनके अनुकूल भी हो गया और जिन्हें टिकट मिलने का इशारा भी मिल गया। दूसरे नंबर पर वे सहमे हुए हैं, जिनके लिए यह आखिरी चांस है। अगर इस बार बमुश्किल सामान्य हुए वार्ड से दावेदारी नहीं हो पाई तो फिर अगले 15 साल बाद लगेगा नंबर। तब तक चुनावी उम्र भी पार हो जाएगी। तीन महीने पहले हुए वार्ड आरक्षण के कारण इस बार दावेदारों का अपने-अपने इलाकों को वोटिंग के लिहाज से चाकचौबंद करने का खासा वक्त मिल गया था और वे इसी हिसाब से क्षेत्र में सतत सक्रिय भी हैं। ऎसे में कोर्ट के प्रकरण ने सारी तैयारियों को मुल्तवी करने पर मजबूर कर दिया है।

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