द्वीप को लेकर चीन-जापान में फिर ठनी

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टोक्यो/ बीजिंग. पूर्वी चीन सागर में सेनकाकू द्वीप पर अधिकार को लेकर चीन और जापान में एक बार फिर ठन गई है। इसको लेकर जापान ने चीन के एक विमान के अधिकार क्षेत्र में अवैध रूप से घुसने का आरोप लगाया।
इसके बाद जापान ने भी अपने लड़ाकू विमान उस तरफ भेज दिए थे। हालांकि, बाद में अधिकारियों ने बताया कि चीनी एयरक्राफ्ट अब जापानी सीमा से बाहर जा चुका है। यह पहला मौका है जब चीन ने हवाई घुसपैठ की है। उसके युद्धपोत इससे पहले भी जापानी क्षेत्र में घुस चुके हैं।
चीन और जापान के रिश्तों में तल्खी तब बढ़ गई, जब सितंबर में जापान ने एक जापानी नागरिक से सेनकाकू द्वीप को खरीद लिया था, जिसे चीन में दिआओयू के नाम से जाना जाता है। जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी ओसामा फ्यूजिमूरा ने पत्रकारों को बताया कि, ‘बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद चीन के जहाज तीन दिनों तक हमारे समुद्री क्षेत्र में घूमते रहे।
पिछले दो माह से भी ज्यादा समय से चीनी समुद्री जहाज द्वीप के आसपास आते-जाते रहे हैं, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद यह पहला मौका है, जब जापान ने चीन द्वारा उनकी (जापान की) वायुसीमा का उल्लंघन करने का दावा किया है। जापान ने कहा चीन ने विमान को हमारे वायुसीमा में प्रवेश करा दिया।’ जापान ने चीन पर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी है।
जापान सरकार के प्रवक्ता ओसामू फुजीमूरा ने इस घुसपैठ पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने चीन के सामने इस बाबत कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने जानकारी दी कि चीन की इस हरकत के जवाब में जापान ने अपने 8 एफ-15 फाइटर जेट वहां भेज दिए हैं। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जहां तक उनकी जानकारी है, इस साल यह पहला वाक्या है, जब कोई चीनी विमान जापान के अधिकार क्षेत्र में घुसा है।
घटना गुरुवार को हुई है और शुक्रवार को जापान में केंद्र के चुनाव हैं। वहां लिबरल डेमॉक्रेटिक पार्टी की सत्ता में वापसी की संभावना है। पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार शिन्जो ऐबे इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं। दरअसल द्वीप के पास बड़ा नेचुरल गैस रिजर्व है इसलिए चीन और जापान दोनों की ही नजरें इस पर हैं।

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