श्रम कानूनों के लिए प्रवर्तन तंत्र का सुदृढ़ बनाया जाना

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श्रम और रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने आज राज्‍य सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के लिए ”श्रम कानून एवं अन्‍य श्रम विनियम” संबंधी एक कार्यसमूह स्‍थापित किया है। उसने श्रम कानूनों के प्रवर्तन में सुधार करने के लिए सिफारिश की है कि श्रम कानूनों के कारगर कार्यान्‍वयन के लिए जनशक्ति को बढ़ाया जाए और अवसंरचना में सुधार करके प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ किया जाए। उन्‍होंने कहा कि इस समय औद्योगिक प्रतिष्‍ठान के प्रति प्रवर्तन अधिकारी का अनुपात बहुत कम है। वर्षों से अधिनियमों, प्रतिष्‍ठानों और कामगारों की संख्‍या कई गुणा बढ़ गई है। अत: कार्यसमूह ने प्रवर्तन तंत्र की पदसंख्‍या की पूर्ण समीक्षा करने का सुझाव दिया है। 
मंत्री महोदय ने बताया कि कार्यसमूह ने अपनी रिपोर्ट में उल्‍लेख किया है कि ”श्रम प्रशासन, स्‍वायत निकायों और श्रम न्‍यायनिर्णयन के क्षेत्र में व्‍यावसायिक विशेषज्ञ प्रदान करने के लिए श्रम प्रशासन हेतु एक अखिल भारतीय सेवा का सृजन सहायक हो सकता है।” कार्यसमूह ने यह भी सिफारिश की कि ”न्‍यूनतम मजदूरी अधिनियम, ठेका श्रम अधिनियम तथा कारखाना अधिनियम में प्रस्‍तावित संशोधन, जो इस समय परामर्श की विभिन्‍न अवस्‍थाओं में है, 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान फास्‍ट ट्रेक पर डाल दिए जाने चाहिए। इन अधिनियमों में संशोधनों का श्रम मानकों पर दीर्घगामी प्रभाव होगा और उनसे समावेशी विकास का उद्देश्‍य पूरा करने में मदद मिलेगी।” 

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