ठेकेदारों का नाम नहीं होता ओपन

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ठेकेदारों द्वारा घटिया निर्माण करने, समय पर काम पूरा न करने और काम को अधूरा छोड़ देने जैसी शिकायतें आम हैं, पर नगर निगम प्रशासन तक शिकायत इसलिए नहीं पहुंच पाती कि शिकायतकर्ता को ठेकेदार का नाम, ठेकेदार द्वारा काम पूरा करने की तारीख, कार्य का नाम और कार्य की राशि के बारे में पता नहीं होता है। निगम आयुक्त ने पांच लाख रुपए से अधिक राशि के ठेके वाले सभी ठेकेदारों के नाम कार्य स्थल पर बोर्ड पर सार्वजनिक करने के निर्देश बार दिए, परन्तु आज तक ठेकेदारों के नाम आज तक सार्वजनिक किए जाने की औपचारिकता पूरी नहीं की गई।
नगर निगम द्वारा किए जाने वाले विकास कार्य की गुणवत्ता घटिया होती है। इसके लिए वह ठेकेदार जिम्मेदार होता है, जिसको नगर निगम ठेका देता है। ठेकेदार द्वारा काम निविदा शर्तों के मुताबिक समय पर पूरे हों और कार्य गुणवत्ता भी उच्च कोटी की हो, पर नगर निगम का अमला ठेकेदार से ही सांठगांठ कर गुणवत्ता के सारे मापदण्डों को दरकिनार कर देता है। जो काम जहां चल रहा है, उस क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों को सामान्यत: पता ही नहीं होता है कि विकास का जो काम चल रहा है, वह कब तक पूरा होगा। विकास कार्य चाहे जो हो ठेकेदार की मर्जी पर निर्भर करता है कि वह उसे कब पूरा करे। निगम प्रशासन तक शिकायत जाती भी है तो कार्य स्थल के आधार पर शिकायत होती है और ऐसे में कौन ठेकेदार काम कर रहा है, इसकी खोजबीन होती है, तब तक शिकायत ही गायब हो जाती है। इन सारी समस्याओं का हल निगम प्रशासन ने खोज था और निर्णय लिया था कि पांच लाख रुपए से अधिक कार्य वाले स्थल पर कार्य संबंधी सूचना लगाई जाएगी, जिसमें ठेकेदार का नाम भी होगा। तय किया गया था कि सार्वजनिक की जाने वाली जानकारी एक बोर्ड पर लिखी जाएंगी, जिसमें ठेकेदार का नाम, कार्य पूरा होने की तिथि, कार्य की लागत, कार्य के अंतर्गत कौन से काम होने हैं, वाली जानकारी शामिल रहेगी। यह व्यवस्था लागू हो जाती तो ठेकेदार आम व्यक्तियों से भी डरने लगता, परन्तु निगम प्रशासन ठेकेदारों के नाम सार्वजनिक किए जाने के निर्णय पर अमल नहीं कर पाया है। यही कारण है कि आज भी योजना अंतर्गत किए जाने वाले कार्य की गुणवत्ता और कार्य के आधे-अधूरे होने की शिकायत नगर निगम तक नहीं पहुंच रही। नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने भी अनेक मौकों और भ्रमण के दौरान ठेकेदारों के नाम सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। यही नहीं महापौर ने भी यह निर्देश दिए, लेकिन निगम अधिकारियों की उदासीनता और निगम प्रशासन के अडिय़ल रवैये के कारण मंत्री व महापौर के निर्देश का पालन नहीं हो पा रहा है।

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