गृह मंत्री को फांसी के प्रभाव का एहसास करवा दिया था: उमर अब्दुल्ला

0
12
नई दिल्ली। अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद आज दूसरे दिन रविवार को कश्मीर घाटी में माहौल शांतिपूर्ण है लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है। रविवार को भी कश्मीर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू जारी है। इंटरनेट और मोबाइल सर्विस एहतियात के तौर पर बंद है। इस बीच जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि जिस तरह तरीके से आतंकी अफजल गुरु को फांसी दी गई उससे कश्मीर घाटी में अलगाववादियों को ही बढ़ावा मिलेगा। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर की मौजूदा पीढ़ी जेकेएलएफ के आतंकी मकबूल बट्ट को नहीं पहचानती, लेकिन वो अफजल गुरु को पहचानती है और वो उससे खुद को जोड़कर देखती है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अफजल गुरु की फांसी आने वाले वक्त में कश्मीर घाटी में प्रभाव डाल सकती है। उमर अब्दुल्ला का कहना है था कि अफजल गुरु की फांसी घाटी में लोगों को खुद को देश से अलग-थलग महसूस करने का काम कर सकती है। उनके मुताबिक फांसी से अलगाव की भावना बढ़ेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या आपसे फांसी के पहले सरकार से बातचीत हुई थी, इसपर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जिस दिन वो दिल्ली में थे तो उनकी मीटिंग गृह मंत्री शिंदे से हुई थी। तब उनसे पूछा गया कि अगर अफजल गुरु को फांसी दी जाए तो उसका क्या असर हो सकता है, उमर के मुताबिक उन्होंने घाटी में फांसी से होने वाले प्रभाव के बारे में बता दिया था।
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के दोहरे रवैया पर भी सवाल उठाया। उमर ने कहा कि सिर्फ संसद पर हमले को ही लोकतंत्र पर हमला क्यों कहा जाता है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पर हमले को लोकतंत्र पर हमला क्यों नहीं कहा जाता। उमर ने कहा कि केंद्र सरकार को साबित करना होगा कि वो सिर्फ इसी मामले में फांसी देने के लिए इच्छुक नहीं थी, बल्कि सरकार दूसरे केसों में भी इसी तरह का एक समान बर्ताव करेगी। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री का कहना है कि अफजल की लाश उसके परिवारवालों को सौंपने के लिए वो भारत सरकार से बात करेंगे।
स्रोत – आई बी न खबर  

LEAVE A REPLY