सीएमओ भेड़ाघाट के खिलाफ वारंट जारी

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जबलपुर। नगर पंचायत भेड़ाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एके रावत के खिलाफ मप्र हाईकोर्ट ने वारंट जारी किया है। रावत पर कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है। मंगलवार को नर्मदा तट के प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहे निर्माणों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस राजेन्द्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दो हजार रुपए का जमानती वारंट जारी कर अगली पेशी में हाजिर होने का आदेश दिया है। एड. सतीश वर्मा द्वारा नर्मदा तट किनारे से 100 मीटर के दायरे में हो रहे निर्माण को रोकने वे अवैध निर्माणों को हटाए जाने को लेकर याचिका दायर की गई है, जिसकी मंगलवार को सुनवाई हुई। पेशी में सतीश वर्मा ने बताया कि कोर्ट द्वारा पिछली सुनवाई में नगर निगम जबलपुर और भेड़ाघाट सीएमओ को नर्मदा तटों के सभी अवैध निर्माणों को हटाकर रिपोर्ट पेश करने कहा था। बावजूद इसके सीएमओ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने बताया कि सीएमओ भेड़ाघाट एके रावत ने हाईकोर्ट के आदेश को नजरअंदाज कर अतिक्रमणकारियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। जिससे नर्मदा तट के प्रतिबंधित क्षेत्र में दुकानें, घर व धार्मिक स्थल आदि का निर्माण अब भी हो रहा है। जस्टिस राजेन्द्र मेनन की खंडपीठ ने रावत पर दो हजार रुपए का जमानती वारंट जारी कर 9 अगस्त को हाजिर होने के आदेश दिए हैं। वहीं नगर निगम की ओर से बताया कि नर्मदा तट के प्रतिबंधित क्षेत्र में हुए निर्माणों व अतिक्रमणों की सूची बनाकर कलेक्टर जबलपुर को सौंप दी गई है। जिसका सर्वे कराने के बाद कलेक्टर अगली पेशी में रिपोर्ट पेश करेंगे। जिलहरी घाट जमीन की जांच हो एड. सतीश वर्मा ने कोर्ट को बताया कि जिलहरी घाट के एक विशेष खसरा नंबर में हेरफेर कर उसे सरकारी से निजी बना दिया गया है। इस खसरा नंबर में करीब आठ हैक्टेयर की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसकी जांच कर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता एड. सतीश वर्मा ने स्वयं पैरवी की।

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