अंतिम इच्छा पूछने के बाद रुक गई इस शख्स की फांसी, जाने कैसे

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भोपाल। तारीख 7 अगस्त 2013 . रात के अँधेरे में करीब 11:45 दो शख्स नई दिल्ली में मुख्य न्यायधीश के बंगले पर चीफ जस्टिस से गुहार लगाते है. अजमल कसाब के बाद सूरज उगने से पहले जिस शख्स को फांसी पर चढ़ाया जाना है, उसकी फांसी रोक दी जाए. वे अपनी दलील में कहते है की जिस व्यक्ति को फांसी पर चढ़ाया जाना है वह गरीब है जिसके कारण वह अपना कानूनी पक्ष मजबूती से नही रख सका. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पूरे केस पर ध्यान से गौर किया और फांसी के महज 5 घंटे पहले आधी रात को आदेश जारी किया कि अपनी 5 बेटियों की हत्या के आरोप में सजा काट रहे मगनलाल बारेला की फांसी रोक दी जाए. जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया, तब तक मगनलाल से जबलपुर की जेल में उसकी आखिरी इच्छा भी पूछी जा चुकी थी और उसका मेडिकल चेकअप करके एक अलग वार्ड में रखा गया था. याकूब मेमन की ही तरह सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार मगनलाल बारेला की दया याचिका पर सुनवाई की थी. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दोनों की दया याचिका ठुकरा दी थी. दूसरी बार में मगनलाल को तो राहत मिल गई थी, लेकिन याकूब मेमन इतना खुशकिस्मत नहीं रहा. गुरुवार सुबह उसे फांसी पर चढ़ा दिया गया.मगनलाल को मध्य प्रदेश के सीहोर जिला न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई थी. सभी अदालतों ने उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी. भारत के राष्ट्रपति के पास फांसी को टालने की दया याचिका लगाई गई. 22 जुलाई को राष्ट्रपति ने दया याचिका ठुकरा दी और 8 अगस्त को फांसी की तारीख मुकर्रर कर दी गई. इतना ही नही जिस जल्लाद ने कसाब को फांसी दी वह जल्लाद भी लखनऊ से जबलपुर पहुंच गया. और जल्लाद ने फांसी की रिहर्सल भी कर ली थी. मध्य प्रदेश के सिहोरे जिले के इछावर निवासी मगनलाल का 11 जून 2010 को अपनी पत्नी से संपत्ति को लेकर झगड़ा हुआ था. इसी बात के चलते शराब के नशे में उसने 2 साल से लेकर 6 साल तक की मासूम बेटियो को कुल्हाड़ी से काट कर मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद आरोपी खुद भी फांसी लगा कर आत्महत्या का प्रयास करने लगा जिसे ग्रामीणो ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया. सिहोर जिला न्यायालय ने उसे फांसी की सजा सुनाई. राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट ने भी यह सजा बरकरार रखी थी. फांसी देने के लिए उसे पहले भोपाल सेंट्रल जेल लाया गया, यहां से जबलपुर सेंट्रल जेल भेजा गया था.

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