आईटी क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत, देश का पांचवां एनडीसी होगा भोपाल में

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भोपाल. केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़वई में आईटी पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का भूमिपूजन किया। इस आईटी पार्क और क्लस्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके दो साल के भीतर तैयार होने की उम्मीद है। 
इस भूमिपूजन के साथ ही केंद्रीय मंत्री ने नेशनल डाटा सेंटर, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और आईटी प्रोफेसरों के लिए ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी प्रदेश में खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने डाटा सेंटर के लिए भोपाल के आईटी पार्क में ही जमीन आवंटित करने की घोषणा कर दी। 
मुख्यमंत्री ने बताया कि आईटी पार्क रोजगार के नए अवसर खोलेगा। यहां 12 वीं पास युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे शहरों में बीपीओ को सरकार प्रोत्साहित करेगी। बीस शहरों में बीपीओ कंपनियों के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। 
एयरपोर्ट के पास जमीन देने वाला पहला राज्य : प्रदेश के आईटी मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि आईटी पार्क के लिए एयरपोर्ट के पास की जमीन देने वाला मप्र पहला राज्य है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री की तारीफ की। स्थानीय विधायक विश्वास सारंग ने उनके क्षेत्र को यह सौगात देने के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और मुख्यमंत्री चौहान दोनों का आभार जताया। 
आईटी विभाग के अफसरों के अनुसार  पार्क और क्लस्टर के विकास का जिम्मा हाउसिंग बोर्ड को सौंपा गया है। हाउसिंग बोर्ड ने कामकाज शुरू कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि दो साल के भीतर यह पूरा परिसर बन कर तैयार हो जाएगा। 
आईटी पार्क और इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर के शिलान्यास अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के विज्ञापनों में अलग-अलग आंकड़ों से भ्रम की स्थिति बन गई। केंद्र के विज्ञापन में 17 हजार लोगों को रोजगार का दावा किया गया था, जबकि प्रदेश सरकार के विज्ञापन में 60 हजार रोजगार मिलने का दावा था।
मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ किया कि केंद्र के विज्ञापन में केवल ईएमसी से मिलने वाले रोजगार का जिक्र है, जबकि प्रदेश सरकार के विज्ञापन में ईएमसी के साथ आईटी पार्क से मिलने वाले रोजगार भी शामिल हैं।
भोपाल के आईटी पार्क में स्थापित होने वाला नेशनल डाटा सेंटर देश में पांचवां डाटा सेंटर होगा। अभी चार डाटा सेंटर हैं। इनमें से दो दिल्ली में, एक पुणे और एक हैदराबाद में है। भोपाल का सेंटर एक डिजास्टर रिकवरी सेंटर की तरह काम करेगा। यानी यहां चारों डाटा सेंटर के रिकॉर्ड का बैक अप होगा, ताकि किसी सेंटर पर डाटा डिलीट हो जाने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके।  

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