उत्‍पादन को बढ़ावा देने का एक ठोस कदम ‘मेक इन इंडिया’

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निरेन्‍द्र
देव
संसदीय
लोकतंत्र में सामान्‍य परिस्थितियों में बजट की प्रस्‍तुति आर्थिक परिदृश्‍य का प्रमुख
बिंदु होता है। लेकिन इस वित्‍त वर्ष का मुख्‍य आकर्षण प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र
मोदी द्वारा 25 सितंबर, 2014 को शुरू किया गया ‘मेक इन इंडिया’ अभियान हो सकता है।
इस पहल में घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को
मूल रूप से एक अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने का वायदा किया गया है ताकि 125 करोड़ की आबादी वाले मजबूत
भारत को एक विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तित करके रोजगार के अवसर पैदा हों। इससे
एक गंभीर व्‍यापार में व्‍यापक प्रभाव पड़ेगा और इसमें किसी नवाचार के लिए आवश्‍यक
दो निहित तत्‍वों–
नये मार्ग या अवसरों का
दोहन और सही संतुलन रखने के लिए चुनौतियों का सामना करना शामिल हैं। राजनीतिक नेतृत्‍व
के व्‍यापक रूप से लोकप्रिय होने की उम्‍मीद है। लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ पहल वास्‍तव में आर्थिक विवेक, प्रशासनिक सुधार के न्‍यायसंगत मिश्रण के
रूप में देखी जाती है। इस प्रकार यह पहल जनता जनादेश के आह्वान- ‘एक आकांक्षी भारत’ का समर्थन करती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के शब्‍दों
में, ‘’सबसे बड़ी जरूरत विश्‍वास और आत्‍मविश्‍वास
की है। मैं नहीं जानता हूं कि हमने अपना देश कैसे चलाया है कि हमने हर बात में अपने
देशवासियों पर संदेह किया है। मैं इस कुचक्र को बदलने की जरूरत समझता हूं। हमें अविश्‍वास
से शुरूआत नहीं करनी चाहिए बल्कि शुरूआत विश्‍वास के साथ हो।‘’ उन्‍होंने आगे कहा कि सरकार को तभी हस्‍तक्षेप
करना चाहिए अगर कुछ खामियां हों।
अपने दूरदर्शी बयान की सत्‍यता और भावनाओं में
‘मेक इन इंडिया’ नीति कार्यक्रम यह भी वायदा करता है कि यह
अभियान इस सोच में परिवर्तन दर्शाता है कि भारत किस प्रकार निवेशकों से संबंध रखता
है। वह केवल अनुमति प्रदान करने वाला प्राधिकारी नहीं बल्कि एक सच्‍चा व्‍यापारिक भागीदार
के रूप में हो।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वतंत्रता
दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से अपने पहले भाषण के दौरान ‘मेक इन इंडिया’ की भूमिका तैयार करते हुए कहा था कि अगर
हमें शिक्षा और युवाओं की क्षमताओं का उपयोग करना हैं तो हमें विनिर्माण क्षेत्र को
अपनाना होगा और इसके लिए न केवल हिन्‍दुस्‍तान को अपनी पूरी ताकत लगानी होगी बल्कि
हम पूरे विश्‍व की शक्ति को भी आमंत्रित करते हैं। इसलिए मैं लालकिले की प्राचीर से
पूरी दुनिया के लोगों से अपील करना चाहता हूं आओ, भारत
में निर्माण करो, आओ, भारत
में उत्‍पादन करो और विश्‍व के किसी भी देश में बिक्री करो लेकिन उत्‍पादन यहां करो।
हमारे पास कुछ करने के लिए कौशल,
प्रतिभा, अनुशासन और संकल्‍प मौजूद हैं। हम संसार
को अनुकूल अवसर प्रदान करना चाहते हैं कि यहां आओ और भारत में उत्‍पादन करो। हम विश्‍व
से यह भी कहेंगे कि इलेक्ट्रिकल से इलेक्‍ट्रोनिक्‍स, ऑटोमोबाइल से कृषिजन्‍य वस्‍तुओं के लिए
आइये, भारत में निर्माण करें। कागज या प्‍लास्टिक
के लिए आइये , भारत में उत्‍पादन करें। उपग्रह या पनडुब्‍बी
के लिए आइये, भारत में उत्‍पादन करें हमारा देश शक्तिशाली
है। इस देश में आइये,
मैं आपको निमंत्रण दे
रहा हूं। भाईयों और बहनों,
मैं देश के युवाओं का
विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र में लगे हुए लोगों का आह्वान करता हूं। मैं देश में
तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले युवाओं का भी आह्वान करता हूं। आइये, भारत में निर्माण करें। मैं देश के युवाओं
को कहता हूं कि यह हमारा सपना होना चाहिए कि ‘भारत
में निर्मित’ संदेश विश्‍व के हर कोने तक पहुंचना चाहिए।
यही हमारा सपना होना चाहिए।
यह बेहद महत्‍वपूर्ण उपक्रम है। वास्‍तव में
सरकारी वेबसाइट www.makeinindia.gov.in
का विजन वक्‍तव्‍य अन्‍य
बातों के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में मध्‍यावधि की तुलना में 12-14 प्रतिशत वृद्धि दर प्रतिवर्ष
देश के सकल घरेलू उत्‍पाद में विनिर्माण की हिस्‍सेदारी 16-25 प्रतिशत तक बढ़ाने और
मुख्‍य रूप से अकेले विनिर्माण क्षेत्र में भी 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्‍त नौकरियां
सृजन करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह देखते हुए कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका
कुल उत्‍पादन में 1/4 या 1/5 हैं और जनवरी 2010 में इसमें केवल 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई
है। ये लक्ष्‍य बहुत महत्‍वकांक्षी लगते हैं।
प्राप्‍‍त
किये जाने वाले लक्ष्‍य:-
  
मध्‍यावधि की तुलना में विनिर्माण क्षेत्र में 12-14 प्रतिशत प्रतिवर्ष वृद्धि
करने का लक्ष्‍य।
 देश के सकल घरेलू उत्‍पाद में विनिर्माण की हिस्‍सेदारी 2022 तक बढ़ाकर 16 से 25 प्रतिशत करना।
विनिर्माण क्षेत्र में 2022
तक 100 मिलियन अतिरिक्‍त रोजगार
सृजित करना।
ग्रामीण प्रवासियों और शहरी गरीब लोगों में समग्र विकास के लिए
समुचित कौशल का निर्माण करना।
घरेलू मूल्‍य संवर्द्धन और विनिर्माण में तकनीकी ज्ञान में वृद्धि
करना।
भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा में वृद्धि
करना।
भारतीय विशेष रूप से पर्यावरण के संबंध में विकास की स्थिरता सुनिश्चित
करना।
श्री निरेन्द्र देव स्टेट्समैन के विशेष
प्रतिनिधि है। उन्होंने मोदी टू मोदित्वः एन अनसेंसर्ड ट्रुथ’ सहित कई पुस्तकें लिखी है।     
                                                                                                  
अवसर
का सदुपयोग
आइये, अब हम अवसरों पर नजर डालें। इससे भारत सचमुच
बहुत फायदा उठा सकता है। खासतौर से तब जब हमारे पड़ोसी चीन का उत्‍पादन क्षेत्र दबाव
में आ चुका है। ऐसी खबरें हैं कि चीन में कार्यरत पश्चिमी देशों के कई उत्पाद ऐसे हैं
जो विश्व के सबसे बड़े विनिर्माण केन्द्र से निकलकर दुनिया के किसी अन्‍य हिस्‍से में
जाना चाहते है।   
विश्लेषकों
का कहना है कि चीन में वेतन बहुत तेजी से बढ़ रहा है और श्रम बाजार चुनौतीपूर्ण हो
रहा है। इससे निवेशकों ने पलायन शुरू कर दिया है और चीन की कंपनियां अन्‍य क्षेत्रों
के विकल्‍प पर विचार करने लगी हैं। इनमें वियतनाम, इंडो‍नेशिया
और भारत शामिल हैं।
ऐसे
कौन-से फायदे हैं, जिसकी पेशकश भारतीय व्यापार और विशेषकर विनिर्माण
क्षेत्र करते है?
हमारा
देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली तीन अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक है और वर्ष
2020 तक यह  उत्‍पादकों का सबसे पसंदीदा गंतव्‍य बन जाएगा। यह
उत्‍पादकों के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण बात होगी और वर्ष 2050 तक भारत ब्रिक्‍स देशों
में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने लगेगा। भारतीय विर्निर्माण क्षेत्र में और भी कई सकारात्‍मक
तत्‍व है, इनमें जनसंख्‍या संबंधी बात सबसे महत्‍वपूर्ण
है और यह अगले दो तीन दशकों तक महत्‍वपूर्ण बनी रहेगी। जनशक्ति की गुणवत्‍ता एक अन्‍य
लाभदायक बात होगी।
यह भी महत्‍वपूर्ण है कि भारत में जनशक्ति अन्‍य
देशों के मुकाबले सस्‍ती है। भारत में ऐसे जिम्‍मेदार व्‍यापार घराने हैं, जो भरोसेमंद तरीके से और व्‍यावसायिक आधार
पर काम करते हैं। हमारे देश में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था है, जहां कानून का शासन है और घरेलू बाजार में
उपभोक्‍तावाद के चलते काफी मजबूत व्‍यवस्‍था है।
25
सितम्‍बर को जब ‘मेक
इन इंडिया’ कार्यक्रम की शुरूआत की जा रही थी, तो अनेक वक्‍ताओं ने यहां की तकनीकी और इंजीनियरिंग
क्षमताओं की चर्चा की थी और इनके पीछे महत्‍वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी संस्‍थानों
की उपस्थिति बताई थी। ये पृष्‍ठभूमि सकारात्‍मक बात मानी गई थी।
सकारात्‍मक
बातें :-
·  भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था के रूप
में अपनी हाजिरी दर्ज करा चुका है।
·  यह देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शामिल
होने वाला है और उम्‍मीद की जाती है कि वर्ष 2020
तक यह दुनिया की सबसे बड़ा उत्‍पादक देश बन जाएगा।
·  अगले दो तीन दशकों तक यहां की जनसंख्‍या वृद्धि उद्योगों के अनुकूल
रहेगी। जनशक्ति काम करने के लिए बराबर उपलब्‍ध रहेगी।
·  अन्‍य देशों के मुकाबले यहां जनशक्ति पर कम लागत आती है।
·  यहां के व्‍यावसायिक घराने उत्‍तरदायित्‍वपूर्ण ढंग से, भरोसेमंद तरीकों से और व्‍यावसायिक रूप से
काम करते हैं।
·  घरेलू मार्किट में यहां तगड़ा उपभोक्‍तावाद चल रहा है।
·  इस देश में तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षमताएं मौजूद है और उनके पीछे
वैज्ञानिक और तकनीकी संस्‍थानों का हाथ है।
·  विदेशी निवेशकों के लिए बाजार खुला हुआ है और यह काफी अच्‍छी तरह
से  विनियमित है।
सरकार
ने कई अन्‍य बातों पर भी ध्‍यान देने का वादा किया है। अन्‍य बातों के अलावा वह उत्‍पादन
बढ़ाने की दृष्टि से मौजूदा प्रोत्‍साहन स्‍कीमों से लाभ उठाना चाहती है।
सरकार
ने उपयुक्‍त प्रौद्योगिकियां प्राप्‍त करने के लिए एक प्रौद्यगिकी खरीद एवं विकास कोष
का भी प्रस्‍ताव किया है। इसके अलावा पेटेंट पूल बनाये जाएगे और प्रदूषण रोकने तथा
ऊर्जा की खपत कम करने के लिए उत्‍पादन में काम आने वाले उपकरणों में सुधार लाया जाएगा।
यह
कोष एक स्‍वशासित पेटेंट पूल और लाइसेंस देने वाले प्राधिकरण के रूप में भी काम करेगा।
यह पेटेंटधारकों से बौद्धिक संपदा अधिकार खरीदेगा।
इस
अभियान की शुरूआत करते हुए अपने भाषण में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक बहुत
महत्‍वपूर्ण बात कही। उन्‍होंने कहा कि जो करमुक्‍त प्रोत्‍साहनों की बात की जा रही
है, वह निवेशकों को लुभाने के लिए नहीं है। स्‍पष्‍ट
है कि एक अनुकूल वातावरण विकसित करने की जरूरत है।
सरकार
को नौकरशाही के काम करने की बुराइयों पर भी जीत हासिल करनी है। ये ऐसी बाधाएं हैं, जिन्‍हें अगर काम करना है, तो दूर करनी ही होंगी।
जनशक्ति
प्रशिक्षण
कोई
भी उत्‍पादन क्षेत्र बिना कुशल जनशक्ति के सफल नहीं हो सकता। इसी सिलसिले में यह संतोषजनक
बात है कि सरकार ने कौशल विकास के लिए नये उपाय किये हैं। इनमें से निश्‍चय ही गांवों
से रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन रुकेगा और शहरी गरीबों का अधिक समावेशी विकास
हो सकेगा। यह उत्‍पादन क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम होगा।
नये मंत्रालय – कौशल विकास और उद्यमियता ने राष्‍ट्रीय कौशल
विकास पर राष्‍ट्रीय नीति में संशोधन शुरू कर दिया है। ये ध्‍यान देने की बात है कि
मोदी सरकार ने ग्राम विकास मंत्रालय के तहत एक नया कार्यक्रम शुरू कर दिया है। इस कार्यक्रम
का नाम बीजेपी के नायक पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय के नाम पर रखा गया है। नये प्रशिक्षण
कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में 1500 से 2000 तक प्रशिक्षण केन्‍द्र
खोले जाने का कार्यक्रम है। इस सारी परियोजना पर 2000 करोड़ रुपये खर्च आने
का अनुमान है। यहां सार्वजनिक-निजी भागीदारी प्रारूप में संचालित की जाएगी।
नये प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत युवा वर्ग
को उन कौशलों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनकी
विदेशों में मांग है। जिन देशों को नजर में रखकर यह कार्यक्रम बनाया गया है, उनमें स्‍पेन, अमेरिका, जापान, रूस, फ्रांस, चीन, ब्रिटेन
और पश्चिम एशिया शामिल हैं। सरकार ने हर साल लगभग तीन लाख लोगों को प्रशिक्षित करने
का प्रस्‍ताव किया है और इस प्रकार से वर्ष 2017
के आखिर तक 10
लाख ग्रामीण युवाओं को लाभान्वित करने का कार्यक्रम बनाया गया है।
अन्‍य जो उपाय किये जाने हैं उनमें मूल सुविधाओं
और खासतौर से सड़कों और बिजली का विकास करना शामिल है। लंबे समय तक बहुराष्‍ट्रीय कंपनियां
और सॉफ्टवेयर कंपनियां  भारत में इसलिये काम
करना पसंद करती थी,
क्‍योंकि यहां एक विस्‍तृत
मार्किट और नागरिकों की खरीद क्षमता है। इसके अलावा इस देश में उत्‍पादन सुविधायें
भी मौजूद हैं। इस संदर्भ में यह भी ध्‍यान देने योग्‍य बात है कि यहां पर सशक्‍त राजनीतिक
इच्‍छा शक्ति, नौकरशाहों और उद्यमियों का अनुकूल रवैया, कुशल जनशक्ति और मित्रतापूर्ण निवेश नीतियां
मौजूद हैं।
इसी संदर्भ में सरकार की दिल्‍ली और मुम्‍बई
के बीच एक औद्योगिक गलियारा विकसित करने की कोशिशों की प्रशंसा की जानी चाहिए। सरकार
बहुपक्षीय नीतियों पर काम कर रही है। इनमें मुख्‍य संयंत्रों और मूल सुविधाओं के विकास
में सम्‍पर्क स्‍थापित करने और पानी की सप्‍लाई सुनिश्चित करने, उच्‍च क्षमता की परिवहन सुविधा विकसित करने
का काम शामिल है। इन क्षेत्रों में काम करते हुए सरकार ने पांच सार्वजनिक क्षेत्र के
निगमों को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। सार्वजनिक क्षेत्र के 11 निगम ऐसे हैं, जिनके बारे में सरकार का विचार है कि छः
निगमों को बंद कर दिये जाने की जरूरत है। 1000
करोड़ रूपये की लागत पर इन निगमों के कर्मचारियों के लिए स्‍वैच्छिक
सेवानिव़ृत्ति योजना लाई जा रही है। यह एक बारगी समझौता होगा।
सरकार द्वारा संचालित जिन सार्वजनिक क्षेत्र
की कंपनियों को फिर से काम लायक बनाने का फैसला किया गया है। उनमें एचएमटी मशीन टूल्‍स
लिमिटेड, हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन, नेपा लिमिटेड, नगालैंड पेपर एंड पल्‍प कंपनी लिमिटेड और
त्रिवेणी स्‍ट्रेक्‍चरल्स शामिल हैं।

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