अफजल की फांसी पर सियासी गलियारों में मची हलचल

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अफजल गुरु को फांसी पर लटकाए जाने के बाद सियासी गलियारों में खासा हलचल देखी जा रही है. बीजेपी ने इस फैसले का स्‍वागत करते हुए इसे देर से लिया गया राष्‍ट्रहित का फैसला बताया है.
गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफजल की फांसी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘देर आए, दुरुस्‍त आए.’ उन्‍होंने ट्विटर के माध्‍यम से अपनी राय दी.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को अफजल गुरु को फांसी दिए जाने में हुई देरी पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. हालांकि उन्होंने संसद हमले के दोषी को दी गई फांसी का स्वागत किया.

वेंकैया नायडू से पूछा गया कि केंद्र सरकार ने 2014 के आम चुनावों के मद्देनजर तो अफजल व पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब की फांसी पर निर्णय नहीं लिया? इस पर उन्होंने कहा, ‘हो सकता है. चूंकि सरकार की नीतियां विफल हो रही हैं, इसलिए हो सकता है कि अब वह मृत्युदंड पाने वाले दोषियों पर कार्रवाई कर रही हो.’

उन्होंने कहा, ‘इसके पीछे चाहे कोई भी मंशा रही हो, सरकार को अफजल को फांसी देने में हुई देरी पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.’ नायडू के मुताबिक न्यायालय के फैसले लागू करने में होने वाली देरी आंतकवादियों के मनोबल को बढ़ाएगी.

गौरतलब है कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में शनिवार सुबह 8 बजे अफजल को फांसी दे दी गई. उसे सर्वोच्च न्यायालय ने 2004 में फांसी की सजा सुनाई थी. उसे अक्टूबर 2006 में फांसी दी जानी थी, लेकिन उसकी पत्नी द्वारा दया याचिका दायर किए जाने के बाद इस पर रोक लगा दी गई थी.

दिसम्बर 2001 को 5 हथियारबंद पाकिस्तानी आतंकवादी संसद परिसर में घुस आए थे और उसके बाद उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी थी. इस घटना में 9 लोगों की जान चली गई थी.

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