चांदनी चौक टू चाइना अब हो रहा है चांदनी चौक नो चाइना

0
28

सोशल मीडिया पर ‘ड्रैगन’ के बहिष्कार के अभियान से दिल्ली के व्यापारियों को दिवाली के सीजन में बड़ा झटका लग सकता है। भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में चीन के भारत विरोधी रवैये के बाद सोशल मीडिया फेसबुक, वॉट्सऐप आदि पर चीन से आयातित सामान की खरीद न करने के लिए अपील जारी की जा रही है।

रोशनी के पर्व दिवाली से पहले राजधानी के बाजार चीनी सामान से पटे पड़े हैं। पिछले कई बरस से दिवाली पर ड्रैगन का कब्जा है। माना जा रहा है कि चाइनीज सामान के बहिष्कार अभियान ने अगर और जोर पकड़ा तो दिवाली पर चीन से आयातित सामान की खरीद 20 से 30 प्रतिशत घट सकती है।

दिवाली पर चीन से सामान का आयात तीन-चार महीने पहले हो जाता है। यह अभियान कुछ दिन पहले शुरू हुआ है और उनके पास माल कई महीने पहले आ चुका है। अगर लोगों ने ड्रैगन का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया, तो उनके लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। इसका एक दूसरा पहलू यह है कि अगर दिवाली पर चाइनीज सामान के बहिष्कार की वजह से व्यापारियों का माल नहीं निकल पाता है तो आयातक नए साल और क्रिसमस के लिए चीन को ऑर्डर देने से बचेंगे।

सोशल मीडिया पर चली मुहिम का बाजार में असर इस कदर बढ़ गया है कि लोग मोमबत्ती व पारंपरिक दीये को महत्व दे रहे हैं। बाजार में दीवाली से दो सप्ताह पहले ही पारंपरिक दीये के स्टॉल सज गए हैं। इनकी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं।व्यापारी आदित्य शर्मा ने कहा कि दो साल से पारंपरिक दीये की मांग में इजाफा हुआ है। बीते वर्ष भी मंगवाया गया सामान कम हो गया था। इस वर्ष पहले ही सामान मंगवा लिया है। 30 प्रतिशत अधिक सामान मंगवाया है। चाइनीज सामान के विरोध में चलाई गई मुहिम अच्छी है। देश का पैसा देश में रहेगा और मांग कम होने से पारंपरिक काम छोड़ चुके कुम्हार के लिए भी ये दिवाली खुशियों से भरी होगी और रोजगार में इजाफा होगा।अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन से आयात होने वाले सामानों में 20 से 30 फीसदी तक की कमी आ सकती है.

यानी निर्यात से करीब 6 गुना ज्यादा सामान हम चीन से लेते हैं।जबकि हमारे यहां से चीन को जो सामान निर्यात होता है उनमें खास है कपास, कॉपर, पेट्रोलियम और इंडस्ट्रियल मशीनरी. अब चाइनीज सामान के बहिष्कार का असर जाहिर है कि भारत और चीन दोनों के ही कारोबारियों पर पड़ेगा. भारतीय कारोबारी नए ऑर्डर नहीं देंगे तो चीन को नुकसान होगा जबकि पहले से ही जमा स्टॉक अगर नहीं बिका तो भारतीय कारोबारियों को नुकसान होगा। कुछ लोगों का मानना है की बहिष्कार से पहले हमें सस्ते और भरोसेमंद सामानों का उत्पादन बढ़ना चाहिए।

सोशल साइट्स पर शपथ दिलाई जा रही है कि चीनी सामान का इस्तेमाल नहीं करें। हिंदू-चीनी भाई-भाई का नारा जो पूर्व में प्रचलित हुआ था, उसका अपडेट ‘चीनी-चीनी बाय-बाय’ सोशल साइट्स पर चल रहा है।
चीनी सामानों के बहिष्कार की अपील के बाद बदले माहौल में व्यापारियों ने 150 करोड़ से ज्यादा के चाइनीज सामान का ऑर्डर रद्द किया है. व्यापारियों का कहना है कि राष्ट्रहित पहले कारोबार बाद में,चीन के विरोध में व्यापारी नुकसान उठाने को भी तैयार हैं | चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार देश है. भारत के कुल आयात का छठा हिस्सा चीन से आता है. साल 2015-16 में भारत ने चीन को 9 अरब डॉलर यानी करीब 60 हजार करोड़ रुपये के सामान का निर्यात किया ,जबकि चीन से हमने कहीं ज्यादा 61 अरब डॉलर यानी करीब 4 लाख करोड़ रुपये का सामान आयात किया।

वंही चीन का दावा है कि भारत में जारी मुहिम का असर बिक्री पर देखने को नहीं मिला है। चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीनी प्रोडक्ट्स की अक्टूबर के पहले हफ्ते में रिकॉर्ड बिक्री हुई है।इसके मुताबिक, चीन की मोबाइल फोन कंपनी शियोमी ने भारतीय बाजार में फ्लिपकार्ट, अमेजन इंडिया, स्नैपडील और टाटा क्लिक जैसी कंपनियों की मौजूदगी के बावजूद अक्टूबर के पहले हफ्ते में सिर्फ 3 दिन में 5 लाख फोन्स बेचे हैं।इधर, विरोध के चलते ही विहिप, बजरंग दल, शिव सेना सहित अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने आह्वान किया कि शहरवासी स्वदेशी वस्तुएं ही उपयोग में लें, चाइनीज के साथ अन्य विदेशी वस्तुओं का खुलकर बहिष्कार करें।

LEAVE A REPLY