रेल बजट को आम बजट में मिलाने का फैसला

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रीपरिषद और आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इन फैसलों में रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव पर सहमति दी गई। बुधवार को हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रेल बजट को अलग से पेश करने की दशकों पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया गया।

संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि सन 1924 में यह परंपरा आरंभ हुई थी। उस समय एक विशेषज्ञ समिति ने कहा था कि सरकार का एक बड़ा खर्चा रेलवे में होता था, कई ऐसे वर्ष थे जिनमें रेलवे का खर्चा आम बजट से अधिक होता था, लेकिन धीरे-धीरे आम बजट का खर्चा बढ़ता गया। उन्होंने बताया कि आज कई ऐसे विभाग हैं जिनका खर्चा रेलवे से ज्यादा है और वे आम बजट का हिस्सा हैं जैसे कि रक्षा विभाग। “Rail”, “budget”

उन्होंने बताया कि नीति आयोग की एक समिति ने सिफारिश की थी कि रेल बजट का आकार आम बजट से काफी कम है और केवल परंपरा के आधार पर इसको अलग से पेश करने का कोई आधार नहीं है। अरुण जेटली ने बताया कि मंत्रीपरिषद ने विचार-विमर्श करने के बाद दोनों बजटों को समायोजित करने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि इससे रेलवे की कार्यप्रणाली और प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक अन्य फैसले में मंत्रीपरिषद ने योजनागत और गैरयोजनागत खर्चों में अंतर समाप्त करने पर अपनी सहमति प्रकट की है। [Rail budget], “Rail budget”

वित्त मंत्री ने बजट पेश करने की तिथि के बारे में बताया कि सरकार सैद्धांतिक रूप से इस पक्ष में है कि बजट की जो पूरी प्रक्रिया है, इसमें बजट पारित होना, उसकी चर्चा होना और फिर वित्त बिल पास होना आदि सभी प्रक्रिया 31 मार्च से पहले समाप्त हो जाए। सरकार बजट चर्चा और उसे पेश करने की तिथि के बदलाव के पक्ष में है। इस पर जल्द ही पैसला लिया जाएगा। [Rail], [budget], “general budget”, [general budget], “general”, [general]

एक अन्य फैसले के बारे में उन्होंने बताया कि इस बार 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन में 20 फीसदी के इजाफा किया जाएगा। इस पर मंत्रीपरिषद ने अपनी मंजूरी दे दी है।

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