मप्र के पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव का निधन, लंबे वक्त से चल रहे थे बीमार

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मध्यप्रदेश के पूर्व राज्यपाल और यूपी के पूर्व सीएम रामनरेश यादव नहीं रहे। यादव लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। 89 साल के यादव का पिछले कुछ दिनों से लखनऊ के पीजीआई में इलाज चल रहा था। यादव का अंतिम संस्कार बुधवार को होगा। यादव के निधन पर मध्यप्रदेश के सीएम शिवराजसिंह चौहान ने दुख जताया है।

एक नज़र यादव के राजनीतिक सफर पर
-रामनरेश यादव का जन्म आजमगढ़ में हुआ था और उनके पिता टीचर थे। वर्ष 1977 में यादव जनता दल की सरकार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। वे किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनको राजनीतिक माहौल घर से ही मिला था, क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया के अनुयायी थे।

-उन्होंने बीएचयू से बीए, एमए और एलएलबी की पढ़ाई की और यहीं छात्र संघ की राजनीति से भी जुड़े रहे। इसके बाद कुछ वक्त के लिए वे जौनपुर के पट्टी स्थित नरेंद्रपुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता भी रहे। वर्ष 1953 में उन्होंने आजमगढ़ में वकालत की शुरुआत की।

-इमरजेंसी के दौरान वे मीसा और डीआईआर के अधीन जून 1975 से फरवरी 1977 तक आजमगढ़ जेल और केंद्रीय कारागार नैनी, इलाहाबाद में बंद रहे। रामनरेश 1988 में राज्यसभा सदस्य बने और 12 अप्रैल 1989 को राज्यसभा के अंदर डिप्टी लीडरशिप, पार्टी के महामंत्री और अन्य पदों से त्यागपत्र देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ली।

-8 सितंबर 2011 में वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने और 8 सितंबर 2016 को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ।
व्यापमं घोटाले से जुड़ा था यादव का नाम

-जब रामनरेश यादव मध्यप्रदेश के राज्यपाल थे तब उनका नाम व्यापमं घोटाले से जुड़ा था। जिसके बाद उन्हें राज्यपाल के पद से हटाने की मांग की जा रही थी। लेकिन वे अपने पद से नहीं हटे। इस मामले पर यादव हमेशा कहते रहे कि जांच पूरी होने तक उन्हें दोषी करार नहीं दिया जा सकता। बता दें कि व्यापमं घोटाले में यादव पर पहली एफआईआर साल 2009 में दर्ज की गई थी।

-साल 2011 में राज्य सरकार की बनाई समिति ने अपनी रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें तकरीबन 100 से ज़्यादा लोगों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। इस मामले में अब भी कई लोग फरार हैं। सूत्रों की माने तो अभी तक इस घोटाले में 2000 से ज़्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें मप्र के पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा समेत अन्य 400 से ज्घ्यादा नेताओं के नाम भी शामिल हैं।

व्यापमं घोटाले की हुई थी सीबीआई जांच
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। 2015 में व्यापमं घोटाले में करप्शन, साजिश और धोखाधड़ी जैसे आरोपों का सामना कर रहे रामनरेश यादव ने अपने बचाव में इनडायरेक्टली सीएम शिवराज सिंह चौहान पर लगे आरोपों को ढाल बना लिया था।
-उन्होंने उस एक्सेल शीट की गंभीरता से जांच की मांग उठाई थी, जो पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एसआईटी को सौंपी थी। दिग्विजय सिंह का आरोप था कि संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा की मूल एक्सेल शीट के साथ छेड़छाड़ की गई है और 48 स्थानों पर सीएम (चीफ मिनिस्टर) शब्द को डिलीट कर उसकी जगह राज्यपाल, उमा भारती और मिनिस्टर लिख दिया गया है।

रामनरेश यादव ने जबलपुर हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को कैंसिल कराने के लिए यादव ने जबलपुर हाईकोर्ट में 2015 में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका के ज़रिए यादव ने दलील दी थी कि एक आरोपी के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। इस पर हाईकोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ एफआईआर रद्दर करने का आदेश दिया था।

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