तीन तलाक की प्रथा सही नहीं – हेमा मालिनी

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रुपहले पर्दे से लेकर सियासत तक एक कामयाब सफर तय करने वाली ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी मानती हैं कि अपने देश से तीन तलाक की प्रथा खत्म होनी ही चाहिए।

शनिवार को लखनऊ के होटल ताज विवांता में आयोजित ‘हिन्दुस्तान शिखर समागम’ में एबीपी न्यूज की एंकर नेहा पंत द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देते हुए हेमा ने कहा कि पति-पत्नी के बीच का रिश्ता काफी अहम और संवेदनशील होता है और अगर पत्नी की कोई बात पसंद नहीं आई तो एक बार में तीन बार तलाक कह कर पत्नी को छोड़ देना कहीं से भी ठीक नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर इस प्रथा में बदलाव आता है तो इससे निश्चित ही मुस्लिम औरतों को फायदा होगा, उन्हें राहत मिलेगी।

फिल्म इण्डस्ट्री में रहते हुए प्रशंसकों की लम्बी लाइन से अब राजनीति में आने पर वोटरों की लाइन? कैसा है आपके लिए यह बदलाव?

मैं अभिनेत्री के रूप में तरह-तरह के लोगों से मिली। मान सम्मान सब कुछ मिला। इसी की वजह से राजनीति में आने का अवसर मिला। मैंने राजनीति को एक चुनौती के रूप में लिया। पहले मैं राज्यसभा में थी उस वक्त मैंने राज्यसभा निधि का चैरिटी में इस्तेमाल किया। फिर मैंने तय किया कि मुझे चुनाव लड़ना है।

लोगों ने कहा कि इतना आसान नहीं है चुनाव लड़ना, मैंने इसे चुनौती माना। मैंने अपनी पार्टी से मथुरा से लोकसभा का टिकट मांगा, मुझे टिकट मिला। मैं चुनाव प्रचार में उतरी। कड़ी धूप में मुझे पैदल चलना पड़ता था, कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। मगर यह मेरे लिए कोई नई बात नहीं थी क्योंकि फिल्मों की शूटिंग में भी हम कलाकारों को दिन रात कड़ी मेहनत करनी ही पड़ती है। मगर चुनाव प्रचार के दौरान मुझे जगह-जगह भाषण देना पड़ता था वह मेरे लिए जरूर मुश्किल काम था। मथुरा से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद मुझे लोगों का दु:ख दर्द जानने और उसे दूर करने की कोशिशों का अवसर मिला। हालांकि मुझे मुम्बई से मथुरा पहुंचने में आठ घण्टे लगते हैं मगर मुझे वहां अच्छा लगता है।

जो फिल्मी एक्टर राजनीति में आते हैं उनके प्रशंसक बहुत होते हैं, ऐसे जाने पहचाने चेहरों को ग्लैमर के पैराशूट से चुनाव में उतारने पर क्षेत्र में लम्बे अरसे से काम कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को मायूसी नहीं होती?

ऐसा कुछ नहीं था। चुनाव लड़ने के लिए एक चेहरा चाहिए था। हालांकि पार्टी में मथुरा से टिकट चाहने वाले बहुत थे मगर जब मेरा नाम घोषित हुआ तो सबने समर्थन किया। बाद में यह तो कहा गया कि यह कलाकार है क्षेत्र में आएगी नहीं, टाइम नहीं देगी मगर मैं हर महीने तीन चार दिन मथुरा में रहती हूं।

ऐसा कहा जा रहा है कि आपने अपनी सांसद निधि पूरी की पूरी लड़कियों के स्कूलों के लिए लगा दी है, इसके पीछे आपकी कोई खास योजना है?

नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैंने अपनी सांसद निधि का धन कई चीजों के लिए दिया है, सिर्फ लड़कियों के स्कूल के लिए ही नहीं।

आपको राजनीति में आने के लिए किसने प्रेरित किया और आपने भाजपा को ही क्यों चुना?

यह बहुत पहले की बात है जब विनोद खन्ना चुनाव लड़ रहे थे तो उन्होंने मुझे बुलाया था अपने चुनाव प्रचार के लिए। मैं बहुत इच्छुक नहीं थी मगर मेरी मां ने मुझसे कहा कि वहां जाओ क्योंकि वह अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी आ रहे थे। मेरी माँ इन दोनों नेताओं की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं। मगर मां से मैंने कहा कि मुझे तो भाषण देना आता नहीं, मैं वहां बोलूंगी क्या? तो मेरी मां ने मेरे लिए भाषण लिखा।

भाजपा तेजी से उभर रही थी, उसके बाद तो जब-जब चुनाव होते मुझे पार्टी की तरफ से बुलाया जाने लगा। मुझे भी अच्छा लगने लगा। मैं भाजपा की नीतियों से प्रभावित हुई क्योंकि यह एक ऐसी पार्टी है जो सच्चे अर्थों में राष्ट्र के लोगों की सेवा कर रही है।

फिल्म, नृत्य, राजनीति और परिवार के बीच कैसे सांमजस्य बिठाती हैं?

सबका अपना-अपना वक्त होता है। शुरुआत मैंने डांस से की थी, फिर फिल्में कीं मगर उस वक्त भी नृत्य नहीं छोड़ा क्योंकि मुझे शास्त्रीय नृत्य से लगाव है। फिर परिवार सम्भाला और अब राजनीति में हैं।

वहीं, राजब्बर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लोगों से सीधे जुड़ने का मंत्र देकर खड़ा कर दिया है। प्रदेश में कांग्रेस हर ओर दिखाई दे रही है। उसका कार्यकर्ता जिन्दाबाद कह रहा है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महा गठबन्धन जरूर करना चाहिए। कांग्रेस बाहुबल, धनबल और जाति बल के खिलाफ जनबल से महागठबन्धन करेगी।

रजत पट से राजनीति तक सत्र में राज बब्बर ने कहा कि कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जहां गांधी जी के समाजवाद, भाईचारे और सर्वधर्म सम्भाव की नीतियों पर बातचीत ही नहीं करती बल्कि लड़ाई लड़ती है।

यूपी में कांग्रेस खड़ी हो चुकी है। युवा मुख्यमंत्री के प्रदेश में शीला दीक्षित को सीएम चेहरा बनाए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां चेहरा दे देती हैं और कुछ ढूंढते रहते हैं। गुजरात-दिल्ली से चुनाव लड़ रहे हैं। हकीकत यह है कि 27 साल पहले प्रदेश में जो चीनी मिल और सूत मिल लगी थी आज उनकी क्या हालत है ?

4-4 बार सपा और बसपा की सरकार रही, 3 बार भाजपा की सरकार रही। नोएडा को नेताओं, उनके परिवारों, करीबियों ने एटीएम मशीन बना लिया। जमीन की कीमते बेहताशा बढ़ती गयी। राजबब्बर ने प्रशान्त किशोर की सपा नेताओं और कांग्रेस में भूमिका के बारे में जवाब देते हुए कहा कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने गठबन्धन के बारे में बयान दिया है। प्रशान्त किशोर को लेकर पार्टी में शुरू में जरूर लोगों को खराब लगा लेकिन बाद में सबको अच्छा लगा कि अपनी बात समझाने के लिए नये तरीकों का प्रयोग करना होगा।

यह पूछे जाने पर कि बतौर प्रदेश अध्यक्ष क्या उनकी कोई हैसियत है पार्टी के फैसलों में? राजबब्बर ने कहा कि क्या आपको लग रहा है कि मेरी हैसियत नहीं है। यहां मौजूद पार्टी नेता प्रमोद तिवारी और पी.एल. पुनिया जी को बाहर ले जाकर इस बारे में पूछ लीजिए।

राजबब्बर ने 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले की तीखी आलोचना करते हुए इसे आरबीआई गर्वनर के संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण बताया। उन्होंने कहा कि तीन घंटे में नमक गायब हो जाता है। यह क्या धनबल का इस्तेमाल नहीं है। 8 बजे घोषणा कर दी जाती है कि 12 बजे से नोट बंद। कल मेरा जैसा सिरफिरा आ जाए और सारे नोट बंद कर दे। लोग नौकरी छोड़ कर लाइन में लगे हैं। एटीएम काम नहीं कर रहे। जनता परेशान है। राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाये जाने के सवाल के बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी के सामने तीन राज्यों का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी अपने संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने का फैसला करेगी।

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