इंदौर में फिर छिड़ेगा पारंपरिक ‘हिंगोट युद्ध’

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इंदौर:भाषा: मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के गौतमपुरा गांव में 31 अक्तूबर को हजारों दर्शकों की मौजूदगी में पारंपरिक ‘हिंगोट युद्ध’ छिड़ेगा जिसमें दो प्रतिस्पर्धी दल एक.दूसरे पर बारूद भरी ‘हिंगोट’ दागेंगे।

दीपावली के अगले दिन छिड़ने वाले इस युद्ध में हर बार बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के बावजूद क्षेत्रीय बाशिंदों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी होने के कारण यह परंपरा बरसों से बदस्तूर जारी है।

हिंगोट दरअसल एक जंगली फल है, जो हिंगोरिया नाम के पेड़ पर लगता है। आंवले के आकार वाले फल से गूदा निकालकर इसे खोखला कर लिया जाता है। इसके बाद इसमें कुछ इस तरह बारूद भरी जाती है कि आग दिखाने पर यह किसी अग्निबाण की तरह सर्र से निकल पड़ता है।

जिलाधिकारी पी. नरहरि ने आज ‘पीटीआई.भाषा’ से कहा, ‘‘चूंकि हिंगोट युद्ध से क्षेत्रीय लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी हैं। लिहाजा हम इस पर प्रतिबंध लगाने को लेकर विचार नहीं कर रहे हैं।’’ उन्होंने हालांकि कहा कि प्रशासन हर साल की तरह इस बार भी ‘हिंगोट युद्ध’ में योद्धाओं व दर्शकों की सुरक्षा और घायलों की त्वरित चिकित्सा के हरसंभव इंतजाम करेगा।

‘हिंगोट युद्ध’ को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में एक जनहित याचिका भी लम्बित है।

याचिकाकर्ता दीपक बौरासी ने बताया कि इस याचिका पर अगली सुनवाई 10 नवंबर को होनी है। याचिका में अदालत से गुहार की गयी है कि ‘हिंगोट युद्ध’ को सुरक्षित बनाने के लिये इसमें भाग लेने वाले लड़ाकों की संख्या और हिंगोट में भरे जाने वाले बारूद की मात्रा तय की जाये। इसके साथ ही, इस युद्ध में घायल होने वाले लड़ाकों और दर्शकों को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाये।

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