भारत का कदम उचित

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भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकारों की बैठक पर शंका के बादल मंडराने लगे हैं। पाकिस्तान के भारतीय राजदूत द्वारा कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को आमंत्रण भेजे जाने से भारत सरकार गुस्से में है। भारत सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सा़फ कर दिया कि भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली बैठक का मुद्दा सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के बीच हो रही बातचीत को आगे ब़ढाने का सिलसिला है। 
सरकार के एक अन्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने भी यह कहा है कि पाकिस्तान अगर आतंकवाद और दोनों देशों के रिश्तों को साथ साथ लेकर चलना चाहता है तो ऐसा नहीं होगा। भारतीय प्रशासन ने सा़फ तौर पर पाकिस्तान द्वारा कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को आमंत्रण दिए जाने को स्वीकार नहीं करते हुए अपना विरोध जाता दिया है। पाकिस्तान भी अपने रुख पर अ़डा हुआ है और अपने पक्ष में यह कह रहा है कि कश्मीर के नेताओं को किसी नई पहल के तहत आमंत्रित नहीं किया गया है बल्कि यह सिर्फ एक औपचारिक आमंत्रण है जो हर बार दिया जाता है। 
भारत अपनी तरफ से बार बार दोस्ती और अमन की कोशिश करता है परन्तु पाकिस्तान की ओर से किसी ना किसी तरह उसे नाकाम करने की मंशा रहती है। भारत सरकार द्वारा कुछ महीनों पहले सरकार में मंत्री और सेना के भूतपूर्व अध्यक्ष जनरल वी के सिंह को पाकिस्तान भेजा गया था और उससे पहले भी मोदी सरकार द्वारा किसी न किसी रूप से पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ ब़ढाया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवा़ज शरीफ पर पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों का दबाव है और पाकिस्तानी सेना या खुफिया एजेंसी आईएसआई भी नहीं चाहती कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में किसी भी तरह का सुधार आए। 
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत कम़जोर है और भारत से अच्छे रिश्ते रखने से व्यापार में वृद्धि हो सकती है जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है। साथ ही पाकिस्तान में आंतरिक हिंसा की घटनाएं भी दिन प्रतिदिन ब़ढती जा रही हैैं और पाकिस्तानी सरकार का अपने ही देश में नियंत्रण नहीं है। ऐसे में भारत को यह समझना होगा कि बार बार शांति वार्ता और बेहतर रिश्तों की कोशिश के बावजूद जब पाकिस्तान संघर्ष विराम तो़डने से बा़ज नहीं आता तो पाकिस्तान से भविष्य में भी सौहार्द की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। 
भारत अब विश्व की ब़डी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है और सरकार को भी यह समझना होगा कि भारत से ज्यादा पाकिस्तान को भारत से अच्छे रिश्ते बनाने से फायदा है। भारत को पाकिस्तान सीमा पर पूरी चौकसी बरतते हुए घुसपैठ की किसी भी कोशिश का करारा जवाब देते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पाकिस्तान अपने किसी भी नापाक इरादे को अंजाम तक पहंुचाने में सफल न हो।
जिस तरह अमेरिका विश्व के अनेक देशों पर राष्ट्रीय प्रतिबन्ध लगाने के बाद किसी भी तरह के व्यापारिक रिश्तों को भी तो़ड लेता है उसी तरह भारत को भी पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव बनाने की जरूरत है। अगर पाकिस्तानी एनएसए हुर्रियत और अन्य कश्मीरी नेताओं से मिलने के लिए इतनी उत्सुकता दिखा रहे हैंै तो भारत सरकार को भी बिना झुके इस वार्ता को रद्द करने का ऐलान कर देना चाहिए।

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