अंतरराष्ट्रीय कर पर जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक ऑस्ट्रेलिया में

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काले धन के खिलाफ जारी अपनी मुहिम में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है।
केर्न्‍स: जी20 देशों के वित्त मंत्रियों
के हुए शिखर सम्मेलन में रविवार को ढांचागत सुविधाओं पर विशेष जोर देते हुए गुणवत्ता
निवेश बढ़ाने के लिए वैश्विक बुनियादी ढांचा पहल स्थापित करने पर सहमति बनी है. जी20 देशों के वित्त मंत्रियों
और केंद्रीय बैंकों की बैठक के बाद जारी रिलीज के मुताबिक, “निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित करना
हमारा मूल उद्देश्य है,
इसके लिए पहल के तहत निवेश
वातावरण में सुधार लाना है.”
बयान के मुताबिक, पहल
के लिए कार्यान्वयन तंत्र की घोषणा जी20
समूह के नेता नवंबर में करेंगे. ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जो ऑकी ने दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के
अंत में मीडिया से कहा,
“ढांचागत परियोजनाओं के
लिए एक डाटाबेस विकसित करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं, ताकि परियोजना के निवेशकों को मदद मिल सके.”
गुप्त बैंक खातों के खिलाफ जोरदार अंतर्राष्ट्रीय अभियान चलाने
वाली संस्था ओईसीडी के अध्यक्ष पास्कल सेंट अमन ने इस पर सटीक टिप्पणी करते हुए कहा
कि नई व्यवस्था के आते ही बैंकों में जानकारी गुप्त रखने का दौर इस दुनिया से हमेशा
के लिए खत्म हो जाएगा। भारत में विदेशी निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा काला धान मॉरीशस
के रास्ते आने की बात कही जाती है,
क्योंकि मॉरीशस और भारत
के बीच दोहरी कराधान बचाव संधि की व्यवस्थाओं के तहत निवेशकों को भारत में कर अदायगी
से छूट मिल जाती है। इसके कारण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
दूसरा ऐसा भी दावा किया जाता है कि जी 20 देशों ने काले धन और कर
चोरी की जानकारी साझा करने के लिए जिस नई प्रणाली को विकसित करने का संकल्प लिया है, उसमें सिर्फ गुप्त बैंक खातों में जमा धन
की ही जानकारी हासिल नहीं की जा सकेगी, बल्कि
इसके जरिए इन खातों में मिलने वाले ब्याज, लाभांश, और शेष राशि के बारे में सारी जानकारी मिल
सकेगी।
इसके साथ ही दुनिया के विकसित और विकासशील देशों ने स्वीकार किया
है कि नीतिगत स्तर पर की गई तमाम कोशिशों के बावजूद दुनिया की आर्थिक सेहत अभी तक दुरूस्त
नहीं हो सकी है। आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी है। लिहाजा, इसे गति देने के लिए तत्काल एकजुट प्रयास
की दरकार है।सदस्य देशों ने माना कि सिडनी घोषणापत्र में किए गए संकल्प पर अमल करना
होगा, जिसमें साल 2018 तक जी 20 देशों
की अर्थव्यवस्थाओं की सकल विकास दर को दो प्रतिशत से ऊपर ले जाने का लक्ष्य तय किया
गया है।

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