स्तनपायी जीवों के संरक्षण के लिए विश्वभर में मुख्य इलाकों की पहचान की गई

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स्तनपायी जीवों के संरक्षण के लिए विश्वभर में मुख्य इलाकों की पहचान की गई

वैज्ञानिकों ने स्तनपायी जीवों की हजारों प्रजातियों के संरक्षण के लिए भारत के कुछ हिस्सों समेत दुनियाभर के मुख्य इलाकों को चिन्हित किया है। खास ध्यान उन प्रजातियों पर है जिनके नजदीकी संबंधी जीव बहुत कम हैं।

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) के नेतृत्व में हुए अध्ययन में जमीन पर रहने वाले स्तनपायी जीवों के करीब 4,700 रिहायशों के नक्शों का इस्तेमाल किया गया और इस जानकारी को भी खंगाला गया कि प्रजातियां एक दूसरे से किस तरह संबंधित हैं। इसके माध्यम से उन्होंने विश्व भर के स्तनपायी जीवों की विविधता को बचाने के लिए दुनियाभर में कुछ महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की है।

अध्ययन में हर महाद्वीप में शीर्ष स्थानों की पहचान की गई है। इसमें तटीय क्वींसलैंड, एलिस स्प्रिंग्स के निकट ऑस्ट्रेलियाई डेजर्ट , सुमात्रा और जावा, मेडागास्कर, भारत, चीन और स्पेन के हिस्से शामिल हैं।

एएनयू रिसर्च स्कूल ऑफ बायोलॉजी के डान रोसौर ने कहा, ‘‘ प्राकृतिक रिहायश का नष्ट होना दुनियाभर के स्तनपायी जीवों की प्रजातियों के लिए बड़ा खतरा है। करीब 1,000 प्रजातियां पहले से खतरे में हैं।’’ उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाने वाले इलाकों में संरक्षण के प्रयास करना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि संसाधन खासकर भूमि और धन सीमित हैं।

’’ रोसौर ने कहा कि शोध का उद्देश्य जमीन के सभी स्तनपायी जीवों का संरक्षण है लेकिन इसमें ऐसी प्रजातियों को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है जिनका कोई नजदीकी संबंधी नहीं है और यदि ये जीव खत्म हो जाते हैं तो उनके जैसा कोई नहीं बचेगा।’’