खत्म हो सकता है पाकिस्तान का ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा

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उरी हमले के बाद भारत सरकार पाकिस्तान पर चौतरफा हमले कर रही है एक ओर कूटनीतिक हमलों के जरिए पाकिस्तान को पस्त किया जा रहा है तो दूसरी ओर तमाम संधियों और समझौतों की समीक्षा का संकेत देकर सरकार उसे आर्थिक तौर पर घेरने की भी तैयारी कर रही है।

सरकार ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान को मिलने वाले मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी एमएफएन का दर्जा खत्म किया जा सकता है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री मेघवाल ने कहा कि सरकार के पास पहले से ही इस बारे में प्रस्ताव लंबित हैं। सरकार का कहना है कि वो व्यापार संबंधों से अधिक तवज्जो देश की सुरक्षा को देती है।

दरअसल जब पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया गया, उस वक्त स्थिति अलग थी। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं। भारत ने पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था. इसकी वजह से पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा और कम ट्रेड टैरिफ मिलता है. हालांकि, बदले में पाकिस्तान ने आश्वासन देने के बावजूद भारत को अब तक एमएफएन दर्जा नहीं दिया है ।

इसके अलावा भारत और पाकिस्तान के बीच के मौजूदा तनाव की छाया 56 साल पुरानी सिंधु जल संधि पर भी पड़ सकती है । भारत ने इशारों ही इशारों में साफ कर दिया है कि ऐसी किसी संधि के काम करने के लिए परस्पर विश्वास और सहयोग महत्वपूर्ण है।

1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस संधि पर हस्ताक्षर किया था। इस संधि के तहत ब्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों के पानी का दोनों देशों के बीच बंटवारा होता है । सिंधु नदी संधि को आधुनिक विश्व के इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा माना जाता है। इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है।

पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी जल समझौते उसकी लाइफ लाइन की तरह है. दरअसल संधि के तहत सतलज, व्यास और रावी का अधिकतर पानी भारत के हिस्से में रखा गया जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया ।सिंधु, झेलम और चेनाब में कई पन बिजली परियोजना चल रही है जिससे पाकिस्तान को बिजली मिलती है. इसके अलावा इन तीनों नदियों से सिंचाई की भी व्यवस्था होती है. ऐसे में सिंधु जल समझौते को रद्द करने से पाकिस्तान पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ेगा।

उधर बढते तनाव के बीच गुरुवाररात पाकिस्तान में लडाकू विमानों के आसमान में उडानें भरने से वहां लोगों में दहशत का माहौल बन गया। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने गुरुवार रात ट्वीट किया कि एफ 16 लडाकू विमान इस्लामाबाद के उपर उड रहे हैं। दरअसल उरी हमले के बाद भारत सरकार ने बेहद सख्त रवैया अपनाया है जिससे पाक सकते में है। कूटनीतिक हमलों के बाद देश में पाक के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भी मांग हो रही है।

पीएम ने भी उरी हमले का बाद कहा था कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। बाद में रक्षा मंत्री ने भी कह दिया कि पीएम के बयान को हल्के में न लिया जाए। हालांकि सरकार साफ कर चुकी है किसी भी प्रकार की कार्रवाई सोच समझकर और सही समय पर की जाएगी। वैसे हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक तौर पर पाक को अलग थलग कर दिया है। दुनिया के तमाम देशों ने न केवल उरी हमले की निंदा की बल्कि संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पाक को मुंह की खानी पडी। पाक की ओर से दिए गए डोजियर को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने खारिज कर दिया।

उरी हमले के बाद भारत में लगातार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है। ऐसे में भारत सरकार के ये फैसले पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ा सकते हैं.। इससे पाक पर कूटनीतिक और आर्थिक असर पड़ेगा ही उसकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति भी प्रभावित होगी।

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