नीतिश-लालू-कांग्रेस के महागठबंधन में दरार

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पटना: विधानसभा चुनाव को लेकर बना महागठबंधन जदयू के लोगों को रास
नहीं आ रहा है। वहीं राजद के नेता भी इस गठबंधन से नाराजगी जाहिर करने लगे है। वहीं
कांग्रेस के नेता भी गठबंधन को लेकर कई भागों में बंट गये है। कुल मिलाकर गठबंधन के
तीनों गांठ अपने-अपने अलग अस्तित्व में आने को छटपटा रहे है, क्योंकि गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ने
वाले उम्मीदवारों को अपनी टिकट को लेकर घबराहट शुरू हो गयी है।जदयू के सुप्रीमों नीतीश
कुमार ने हाल के दिनों में जिलेवार कार्यकर्ताओं से मिलने का दौर शुरू किया है। जिसमें
जदयू कार्यकर्ताओं में गठबंधन को लेकर काफी नाराजगी नीतीश से जतायी है। कई जिलों के
कार्यकर्ताओं ने तो इस गठबंधन के विरोध में नीतीश कुमार के आवास के बाहर नारेबाजी भी
की है। स्थिति की नजाकत को देखते हुए नीतीश कुमार अब जिलों से काफी कम संख्या में कार्यकर्ताओं
को बुलाना शुरू कर दिया है। उन्होनें अब हाल ही बनाये गये सलाहकार परिषद् के सदस्यों
को ही बुलाकर उन्हें चुनाव तैयारी का मंत्र देना शुरू किया है।
सलाहकार परिषद के लोग भी गठबंधन से नाराजगी व्यक्त की। कई सदस्य
तो उनकी गाड़ी के सामने आकर जमीन पर लेट गये। अंत में पूर्व मुख्यमंत्री श्री कुमार
ने नाराज कार्यकर्ताओं को अपने आवास पर बुलाकर बैठक की और महागठबंधन के संबंध में कुछ
मूल मंत्र बताये। उन्होनें कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए यह गठबंधन बहुत
जरूरी था। इसपर कार्यकर्ताओं और सलाहकार परिषद के सदस्यों ने कहा कि जब जदयू के मंत्री
और अधिकारी कार्यकर्ताओं की बात सुनते ही नही है तो उनके लिए चुनाव में काम करना बेइमानी
होगा। कार्यकर्ताओं ने श्री कुमार को खुले रूप से बताया कि उनकी बात सरकारी आधिकारी
और कर्मचारी भी नहीं सुनते है। ऐसे में वे किस मुहं से जनता के बीच वोट मांगने जायेंगे।
जीतने के बाद जदयू विधायक भी कार्यकर्ताओं से कतराते है। जदयू सुप्रीमों श्री कुमार
ने भी महसूस किया है कि उनके शासनकाल के दौरान कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा हुई है।
कार्यकर्ताओं का दर्द उन्हें पद से हटने के बाद अब पता चल रहा है। कार्यकर्ताओं का
दर्द यदि यहीं रहा तो पार्टी की हालात लोकसभा चुनाव जैसी हो सकती है।

दूसरी ओर राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह भी गठबंधन
से नाराज है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव में जितनी सीटे राजद को चाहिए, उतनी अ अब नहीं मिल सकता है। इसके अतिरिक्त
उन्होेनंे कहा कि जदयू के नेता राजद के नेताओं को छोटा समझ रहे है। मंत्री से अधिकारी
तक राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं को तव्वजों नहीं दे रहे है। जिसके कारण राजद के विधायकों
के इलाके में विकास के काम नहीं हो पा रहा है। अभी यदि यह हाल है तो आगे क्या होगा।यहीं
हाल गठबंधन में शामिल तीसरे दल कांग्रेस का है। प्रदेश कांग्रेस के उपाघ्यक्ष प्रेमचन्द्र
मिश्रा की माने तो प्रदेश कांग्रेस के 85 से
90 प्रतिशत लोग गठबंधन के खिलाफ है। मात्र दो-तीन
प्रतिशत लोग अपने फायदा और सत्ता सुख के लिए गठबंधन में शामिल है। उन्होनें कहा कि
आज बिहार में पिछलग्गू होने के कारण ही कांग्रेस इस हालत में आ गयी है। उन्होनें कहा
कि अगले माह राहुल गांधी बिहार आ रहे है, जिन्हें
स्थिति से अवगत कराया जायेगा। आज जरूरत है बिहार में कांग्रेस को मजबूत करने का।

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