राज्यपाल का पद कबाड़खाने में पड़े लोगों की व्यवस्था के लिए: शिवसेना

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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राज्यपालों की नियुक्ति‍ पर सवाल उठाते हुए पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है कि राज्यपाल का पद कबाड़खाने में पड़े लोगों की व्यवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है।

‘राजभवन का ब्रांड बदला’ शीर्षक से शुक्रवार को छपे संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि, ‘राज्यपाल नियुक्ति के बारे में जो कुछ कांग्रेसी शासन में घट रहा था, वही सब मोदी के शासन में घटित हो रहा है। सिर्फ ‘ब्रांड’ बदल गया है। राज्यपाल का मतलब जनता के पैसे पर पलने वाला सफेद हाथी है।

राज्यपाल का पद क्यों?

श‍िवसेना ने सवाल उठाते हुए लिखा है कि, ‘सवाल यह है कि राज्यपाल का पद चाहिए ही क्यों? यह सवाल वैसे ही पुराना है, फिर भी अपने राजनीति‍क विचारों के कबाड़खाने मे पड़े लोगों की व्यवस्था करने के लिए राज्यपाल पद का उपयोग किया जाता है।

यह पद बंगला-गाड़ी की व्यवस्था जैसी

राज्यपालों की नई सूची के संबंध में लिखा गया है कि, ‘देशभर के मौजूदा राज्यपालों की सूची पर नजर घुमाएं तो यह बात आसानी से ध्यान में आ जाती है। अब तक इन पदों पर नियुक्त किए गए सारे लोग ‘भाजपा’ के कार्यकर्ता और नेता हैं। राज्यपाल, नायब राज्यपाल पद के कारण सत्ताधारी पार्टी के करीब 40 लोगों के लिए गाड़ी-घोड़ा, बंगला एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था हो जाती है।

मित्र दलों में भी हैं अनुभवी लोग

भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा गया है कि इन पदों पर राजनीति‍क कार्यकर्ताओं की नियुक्ती करनी होगी तो राष्ट्रीय जनतांत्रि‍क गठबंधन के तेलगु देशम, अकाली दल, शिवसेना में भी पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री आदि लोग कर्तव्य निभाने के लिए तैयार हैं। एकाध राजभवन राष्ट्रीय जनतांत्रि‍क गठबंधन के हिस्से में आने पर किसी को आपत्ति‍ नहीं होनी चाहिए। अनुभवी एवं कर्तव्यनिष्ठ लोग मित्र दलों में भी भरपूर है। लेकिन सरकार 280 वाले चला रहे हैं, तब तक मित्रों की बातों को कोई सुनेगा ऐसा लगता नहीं है।

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