जब मन की भावनाएं ढलने लगे सोशल मीडिया के स्टेटस में

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पके सामने मौन हो जाने वाला संभव है विरोध की अपेक्षा ही न करता रहा हो या संभव है उसमे आपके विरुद्ध जाने की सामर्थ्य न हो या फिर वो आपके विरुद्ध स्वयं को सहन ही न कर पाये | शब्द अमूल्य निधि हैं साधू सोच समझ कर इनका जाल बुनना चाहिए | केवल प्रभावित करने के लिए कहे शब्द प्रभावित तो करेंगे ही किसी को सहलाएंगे, किसी को चोट पहुंचाएंगे | तर्क से आप सिद्ध कर सकते हैं कि किसी व्यक्ति विशेष के विरोधी नहीं हैं |
किन्तु आपके निशाने पर आये समूह में यदि स्वाभाविक रूप से या वैचारिक स्तर पर वो भी खड़ा हो तो जाने अनजाने आहत हो ही जाता है | तब उसके सामने दो ही मार्ग रहते है या तो वो खुलकर आपको गलत सिद्ध करे या फिर यदि वो सम्बन्धो को अहम की बली नहीं चढ़ाना चाहेगा तो मौन हो जायेगा | निर्भर करता है की उसके लिए आपके कहे शब्द महत्वपूर्ण है या आप | फिर कैसी उद्द्विगनता कैसा संताप आत्मविश्वास के साथ अपने चुने मार्ग पर बढ़ते रहिये | यदि सही मार्ग मार्ग चुना है तो बिना किसी समर्थन के ही या अगणित विरोधो के बाद भी सफलता मिल ही जाएगी |

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