सुभाष चन्द्र बोस सार्वजनिक रुचि का विषय

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देश में इन दिनों नेताजी सुभाष चन्द्र बोस सार्वजनिक रुचि का विषय बन गये हैं। अंग्रेजों द्वारा वे द्वितीय विश्‍व युद्ध के समय युद्ध-अपराधी घोषित किए गये थे।18 अगस्त 1945 को ताईहोकू की विमान-यात्रा करते हुए उन्हें अन्तिम बार देखा गया था। वह विमान दुर्घटना ग्रस्त हो गया था। तब से ही आधिकारिक तौर पर यह माना जाता रहा है कि इसी विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गई थी। मगर, नेताजी से लगाव रखने वालों ने उनकी मौत की खबर को अफवाह माना।
महात्मा गांधी को भी लगता रहा कि नेता जी जीवित हैं। गॉंधी ने उनके परिजनों को नेताजी का श्राद्ध नहीं करने की सलाह भी दी थी। बाद में अपने एक लेख में गॉंधी ने कहा था कि उन्हें जो लगता था वह बेबुनियाद था। तबसे ही नेताजी की मौत रहस्य के घेरे में है। बीच-बीच में नेताजी के देखे जाने के संबंध में खबरें भी छपती रही हैं। इस समय उनकी फाइलों को सार्वजनिक करने का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह बात सच है कि नेताजी को लेकर प. बंगाल के लोग संवेदनशील हैं। लोक सभा चुनावों के प्रचार के दौरान प.बंगाल के लोगों से मोदी ने वादा किया था कि वे नेताजी की मौत के रहस्यों से पर्दा उठाएंगे। पहले से ही भाजपा सहित कई कांग्रेस विरोधी दलों का आरोप रहा है कि नेताजी की मौत के कारणों के उद्भेदन में गॉंधी और नेहरु ने कोई रुचि नहीं दिखाई। इन दिनों कथित रूप से नेहरु का लिखा एक पत्र भी वायरल हुआ है। यह पत्र इंगलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री को संबोधित है जिसमें नेहरु ने सुभाष चन्द्र बोस के,स्तालीन के सहयोग से रुस में होने की बात बताई है तथा याद दिलाया है कि सुभाष युद्ध अपराधी भी हैं।
यह बात भी कांग्रेस के इतिहास का हिस्सा है कि वर्ष 1939 में कांग्रेस से नाराज होकर नेताजी ने आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी। अजाद हिन्द फौज ने द्वितीय विश्‍व युद्ध के समय जापान के साथ मिल कर ब्रिटिश-इंडियन आर्मी का मुकाबला किया था। उनके कांग्रेस विरोधी तेवर के कारण ही यह बात प्रचारित हो पाई कि उनकी गुमशुदगी का रहस्य कांग्रेस सरकार विदेशी संबंधों की सुरक्षा के नाम पर बरकरार रखना चाहती है। किन्तु अब केन्द्र में भाजपा की सरकार है।
मोदी सरकार ने नेताजी की मौत से पर्दा उठाने की दिशा में अब तक कुछ खास निर्णय नहीं लिया। अगले वर्ष प.बंगाल में विधान सभा के चुनाव होने वाले हैं। ममता बनर्जी को लगा कि केन्द्र ऐसा कुछ करे इससे पहले वे इसका श्रेय ले लें। इसलिए पं. बंगाल पुलिस के लॉकर में बंद नेताजी से संबंधित 64 फाइलें उन्होंने सार्वजनिक करा दीं। केन्द्र सरकार के पास भी नेताजी से संबंधित 133 फाइलें हैं किंतु, केन्द्र सरकार के लिए इन फाइलों को सार्वजनिक करना आसान नहीं होगा।
इन फाइलों का संबंध विदेश विभाग से भी है। वेंकैया नायडू ने कहा है कि फाइलों के अध्ययन के बिना उनको सार्वजनिक किये जाने के संबंध में कुछ कहा नहीं जा सकता। विधान सभा चुनावों के दौरान प.बंगाल में नेताजी की फाइलों को लेकर राजनीति गर्मा सकती है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने कोलकाता में नेताजी के रिश्तेदारों से भेंट की थी तथा अब अगले महीने प्रधानमंत्री आवास पर नेताजी के पचास परिजनों की मेहमाननवाजी करेंगे।
हालांकि देखना होगा कि केन्द्र सरकार नेताजी से संबंधित फाइलें सार्वजनिक कर पाती है या नहीं। अगर वह ऐसा करने की स्थिति में न भी हो तो मोदी के पास ममता के तुरुप के पत्ते का जवाब होगा । वे प. बंगाल की जनता से कह सकेंगे कि वे नेताजी के प्रति संवेदनशील थे, हैं और आगे भी रहेंगे।
नेताजी के परिजनों से मिलना उनकी इस बात की गवाही देने के लिए काफी होगा। बहरहाल, केन्द्र के पास उपलब्ध फाइलों का सार्वजनिक करना विदेश नीति को कहां कितना प्रभावित कर सकता, यह भी देखने वाली बात होगी परंतु नेताजी की फाइलें कांग्रेस को मुश्किल में अवश्य डालेगी।

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