तालाब से शवयात्रा निकालने के मामले की गहराई से होगी जांच

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जबलपुर | जिले की पनागर तहसील की ग्राम पंचायत बम्हनौदा के आश्रित गाँव बेहर में कल तालाब से होकर निकाली गई शवयात्रा के मामले में पंचायत पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। कलेक्टर महेश चन्द्र चौधरी के निर्देश पर आज जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह ने क्षेत्र की अनुविभागीय दण्डाधिकारी, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी, तहसीलदार एवं थाना प्रभारी के साथ मौका मुआयना किया और इस बारे में ग्रामीणों से चर्चा भी की। मामले में अनुविभागीय दण्डाधिकारी ने शवयात्रा में शामिल लोगों के बयान भी दर्ज किये गये हैं।

कलेक्टर श्री चौधरी ने बताया कि बेहर ग्राम में स्थानीय पटैल परिवार में हुई गमी के बाद तालाब से शवयात्रा निकाले जाने के इस मामले की गहराई से जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले की प्रारंभिक जाँच में इसकी मुख्य वजह सरपंच पति मनोज बैरागी और स्थानीय कृषक नलिन शर्मा के बीच चल रहा विवाद है। उन्होंने बताया कि मामले में पंचायत पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी जाँच की जा रही है और दोषी पाये जाने पर उनके विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी।

कलेक्टर ने बताया कि तालाब से शवयात्रा निकाले जाने के इस मामले की प्रारंभिक जाँच में श्मशान की भूमि पर और श्मशान के रास्ते पर किसी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं पाया गया। उन्होंने कहा कि जिन पंचायत प्रतिनिधियों खासतौर पर सरपंच को गाँव में हुई गमी के मौके पर सहयोग करने और व्यवस्थायें बनाने का दायित्व निभाना था तथा प्रशासन एवं पुलिस को सूचना देनी थी, उन्हीं पंचायत प्रतिनिधियों ने लोगों को तालाब से शवयात्रा निकालने के लिए प्रेरित किया और इसे विवादित एवं दुष्प्रचारित करने का जरिया बनाया।

इधर पनागर के तहसीलदार ने बताया कि श्मशानघाट तक वैकल्पिक मार्ग होने के बावजूद आपसी विवाद की वजह से जानबूझकर शवयात्रा को तालाब से निकाला गया। उन्होंने बताया कि मामले में जिस नलिन शर्मा को दूसरा पक्ष बताया गया है वह पिछले दो दिनों से गाँव से बाहर है। तहसीलदार के मुताबिक मामला सरपंच पति मनोज बैरागी और कृषक नलिन शर्मा के बीच चल रहे पुराना विवाद का नतीजा है। यह मामला नलिन शर्मा के फसल रखने के लिए बनाये गये बंडे तोड़ने तथा नलिन शर्मा की माँ द्वारा सरपंच पति जो वर्तमान में समिति अध्यक्ष है के खिलाफ उनके नाम पर धान खरीदी में किये गये घोटाले की शिकायत को लेकर दर्ज कराये गये आपराधिक प्रकरण से भी जुड़ा हुआ है।

तहसीलदार ने बताया कि सरपंच पति द्वारा नलिन शर्मा पर दबाव बनाने के लिए वैकल्पिक मार्ग होने के बावजूद शवयात्रा को तालाब से निकालने के लिए ग्रामवासियों को प्रेरित किया गया और सुनियोजित तरीके से दुष्प्रचार फैलाया गया। उन्होंने बताया कि पटैल परिवार में हुई गमी के बाद निकाली गई शवयात्रा में 70 से 80 लोग शामिल हुए थे और केवल दस-बारह लोग ही शव को लेकर तालाब से श्मशानघाट तक गये, जबकि शेष सभी लोग वैकल्पिक मार्ग से श्मशानघाट पहुंचे थे।

उन्होंने बताया कि दाह संस्कार के लिए लकड़ी और कंडे भी वैकल्पिक मार्ग का ही उपयोग किया गया तथा अंतिम क्रिया सम्पन्न होने के बाद सभी लोग यहां तक कि तालाब से शवयात्रा निकालने में शामिल लोग भी वैकल्पिक मार्ग से ही वापस हुए।

इसी बीच प्रशासन द्वारा श्मशानघाट तक मार्ग का निर्माण प्रारंभ करा दिया गया है। श्मशानघाट तक मार्ग के निर्माण के लिए नलिन शर्मा और एक अन्य कृषक प्रकाश शुक्ला ने अपनी भूमि दान में देने के लिए शासन के पक्ष में अपनी हकदारी त्याग दी है। श्मशानघाट से लगी निजी भूमि को भी श्मशानघाट के लिए दान कर दी गई है। श्मशानघाट का निर्माण का कार्य मनरेगा के तहत पूर्व से ही स्वीकृत है जिसे बारिश के बाद प्रारंभ कर दिया जायेगा।

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