सरकार ने अर्थव्‍यवस्‍था में किसानों के हित के साथ-साथ दिया डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

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500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के चलन को निरस्‍त करने के बाद केन्‍द्र सरकार ने समाज के विभिन्‍न तबकों की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए अनेक उपायों की घोषणा की है। एपीएमसी बाजार/मंडियों में किसानों और पंजीकृत व्‍यापारियों के लिए अपेक्षाकृत ज्‍यादा नकदी की निकासी सीमा, फसल बीमा प्रीमियम के भुगतान के लिए समय सीमा बढ़ाना, चुनिंदा सरकारी केन्‍द्रों इ‍त्‍यादि से 500 रुपये के पुराने बैंक नोटों से बीजों की खरीद की अनुमति जैसे विशेष उपायों की घोषणा पहले ही किसानों के हित में की जा चुकी है।

बैंकों की ग्रामीण शाखाओं और 1.55 लाख डाकघरों में नकदी की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाये गये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपेक्षाकृत ज्‍यादा नकदी सीमा के साथ बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट के नेटवर्क को सक्रिय कर दिया गया है। इस मामले में आगे समीक्षा करने के बाद सरकार ने चालू रबी सीजन में किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष निर्णय लिये हैं। ये निर्णय परिचालनगत उपायों के रूप में हैं, जिनका उल्‍लेख नीचे किया गया है :

1. नाबार्ड ने रबी सीजन में कृषि संबंधी कार्यकलापों के लिए राज्‍य सहकारी बैंकों के जरिये जिला केन्‍द्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को 21,000 करोड़ रुपये की सीमा उपलब्‍ध कराई है। इससे डीसीसीबी को प्राथमिक कृषि सहकारी सोसायटी (पीएसीएस) के नेटवर्क के जरिये किसानों के लिए फसल ऋणों को मंजूरी देने एवं इनका वितरण करने में सहूलियत होगी। इससे 40 फीसदी से भी ज्‍यादा ऐसे छोटे एवं सीमांत किसान लाभान्वित होंगे, जो संस्‍थागत कर्ज/फसल ऋण लेते रहे हैं। यही नहीं, आवश्‍यकता के मुताबिक नाबार्ड द्वारा अतिरिक्‍त सीमाएं सुलभ कराई जाएंगी।

2. आरबीआई और बैंकों को डीसीसीबी में आवश्‍यक नकदी उपलब्‍ध कराने की सलाह दी गई है। इससे चालू रबी सीजन के दौरान विशेषकर बुवाई एवं अन्‍य कृषि कार्यों के लिए किसानों को ऋणों का त्‍वरित एवं निर्बाध प्रवाह के साथ-साथ आवश्‍यक नकदी भी सुनिश्चित होगी।

3. छोटे कर्जदारों (अर्थात् एक करोड़ रुपये तक के कर्ज लेने वाले लोग) को राहत देने के उद्देश्‍य से भारतीय रिजर्व बैंक बकाया रकम के पुनर्भुगतान के लिए 60 दिनों का अतिरिक्‍त समय देने का निर्णय पहले ही ले चुका है। यह फैसला आवास एवं कृषि ऋणों सहित उन सभी पर्सनल एवं फसल ऋणों पर लागू होगा, जो बैंकों, एनबीएफसी, डीसीसीबी, पीएसी अथवा एनबीएफसी-एमएफआई से लिये गये हैं।

4. कुल मिलाकर 30 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किये गये हैं, जिनमें जन धन खाता धारकों को जारी किये गये रुपे डेबिट कार्ड भी शामिल हैं। पिछले 12 दिनों में रुपे डेबिट कार्डों के इस्‍तेमाल में लगभग 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस डेबिट कार्ड के उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंकों ने 31 दिसम्‍बर, 2016 तक ट्रांजैक्‍शन शुल्‍क (एमडीआर) न लेने का निर्णय लिया है। भारतीय राष्‍ट्रीय भुगतान परिषद (एनपीसीआई) ने रुपे कार्डों के लिए स्विचिंग चार्ज को पहले ही माफ कर दिया है। इन सभी कदमों से विभिन्‍न प्रतिष्‍ठानों ने डेबिट कार्डों की स्‍वीकार्यता बढ़ेगी।

5. डेबिट कार्डों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ कुछ निजी बैंकों ने भी 31 दिसम्‍बर, 2016 तक एमडीआर शुल्‍क को माफ करने का निर्णय लिया है। निजी क्षेत्र के अन्‍य बैंकों द्वारा भी इस आशय का निर्णय लिये जाने की आशा है। इस तरह स्विचिंग सेवाओं पर लगने वाले शुल्‍कों सहित ट्रांजैक्‍शन शुल्‍क को 31 दिसम्‍बर, 2016 तक माफ कर दिया गया है।

6. ई-वॉलेट के जरिये भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से आरबीआई ने आम लोगों के लिए मासिक ट्रांजैक्‍शन सीमा को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये करने का निर्णय लिया है। आरबीआई ने कारोबारियों के लिए भी इस सीमा में इतनी ही बढ़ोतरी की है।

7. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने आरक्षित ई-टिकट लेते समय द्वितीय श्रेणी पर 20 रुपये का सर्विस चार्ज और इससे ऊपर की श्रेणी के टिकटों पर 40 रुपये का सर्विस चार्ज 31 दिसम्‍बर, 2016 तक न लेने का निर्णय लिया है। इससे नकदी के जरिये रेलवे के काउंटरों पर टिकट खरीदने के बजाय ई-टिकटों को खरीदने के लिए यात्रीगण प्रोत्‍साहित होंगे।

टिकटों की कुल खरीद में ऑनलाइन ई-टिकट खरीदने वाले यात्रियों की दैनिक औसत संख्‍या 58 प्रतिशत और नकदी के जरिये काउंटरों पर टिकट खरीदने वाले यात्रियों की दैनिक औसत संख्‍या 42 प्रतिशत है। अब ई-टिकट की खरीदारी बढ़ाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। उम्‍मीद की जा रही है कि इस कदम से लोग नकदी रहित लेन-देन करने के लिए प्रोत्‍साहित होंगे।

8. टीआरएआई ने बैंकिंग से संबंधित लेन-देन और भुगतान के लिए यूएसएसडी चार्ज को मौजूदा 1.50 रुपये प्रति सत्र से घटाकर 0.50 रुपये प्रति सत्र करने का निर्णय लिया है। इसने संबंधित चरणों की संख्‍या को भी मौजूदा पांच से बढ़ाकर आठ चरण कर दिया है। टेलीकॉम कंपनियां भी प्रति सत्र 50 पैसे के उपर्युक्‍त यूएसएसडी चार्ज को 31 दिसम्‍बर, 2016 तक माफ करने पर सहमत हो गई हैं। इसके परिणामस्‍वरूप यूएसएसडी चार्ज 31 दिसम्‍बर, 2016 तक शून्‍य रहेगा। इससे विशेषकर फीचर फोन वाले गरीब लोगों (इनकी संख्‍या फिलहाल देश में कुल फोनों का 65 फीसदी है) को डिजिटल वित्‍तीय लेन-देन की अत्‍यंत किफायती सुविधा सुलभ हो जाएगी।

9. वाहन चालकों को अपना काफी समय चेक पोस्‍ट और टोल प्‍लाजा पर गुजारना पड़ता है। जहां एक ओर जीएसटी की बदौलत चेक पोस्‍ट पर यह समस्‍या दूर हो जाएगी, वहीं दूसरी ओर राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर अवस्थित टोल प्‍लाजा पर भुगतान में सहूलियत के लिए कुछ विशेष उपाय अत्‍यंत आवश्‍यक हैं। इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय वाहन निर्माताओं को अपने सभी नये वाहनों में ईटीसी के अनुरूप ‘आरएफआईडी’ सुलभ कराने की सलाह दे रहा है।

10. सभी सरकारी संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्‍य सरकारी प्राधिकरणों को सलाह दी गई है कि वे सभी हितधारकों और कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए केवल डिजिटल भुगतान वाली प्रणालियों जैसे कि इंटरनेट बैंकिंग, एकीकृत भुगतान इंटरफेस, कार्डों, ‘आधार’ के अनुरूप भुगतान प्रणाली इत्‍यादि का ही उपयोग करें। भुगतान करने के समय प्राधिकरणों के लिए यह आवश्‍यक होगा कि वे कार्डों, इंटरनेट बैंकिंग, एकीकृत भुगतान इंटरफेस, ‘आधार’ के अनुरूप भुगतान प्रणाली इत्‍यादि के जरिये भुगतान का विकल्‍प मुहैया करायें।

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