इस्राइल के राष्‍ट्रपति की यात्रा ऐतिहासिक : राष्‍ट्रपति

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राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कल (15 नवम्‍बर, 2016) को राष्‍ट्रपति भवन में इस्राइल के राष्‍ट्रपति महामहिम श्री रिवेन रिवलिन और श्रीम‍ती नेचमा रिवलिन का स्‍वागत किया। उन्‍होंने उनके सम्‍मान में एक भोज का भी आयोजन किया।

इस्राइली राष्‍ट्रपति का स्‍वागत करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक है, क्‍योंकि यह 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही है।

राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि भारत के लिए यह संतोषजनक बात है कि 1992 से ही भारत और इस्राइल के संबंध बेहतर रहे है। दोनों देशों के विपक्षी संबंध विविधतापूर्ण रहे हैं और दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां उच्‍चस्‍तीय यात्रायें की हैं। इससे दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाईयों पर पहुंचे हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत ‘स्‍मार्ट सिटी’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्‍वच्‍छ भारत’ जैसे प्रमुख कार्यक्रमों में इस्राइल द्वारा भाग लेने की दिलचस्‍पी का स्‍वागत करता है। भारत के कृषि क्षेत्र में इस्राइल की भागीदारी महत्‍वपूर्ण है और इससे हमारे किसानों को लाभ मिल रहा है।

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के वक्‍तव्‍य का जवाब देते हुए इस्राइली राष्‍ट्रपति ने कहा कि मध्‍य-पूर्व और भारत एक-दूसरे को हजारों सालों से जानते हैं तथा इस्राइल भारत के लोगों के साथ अपने ज्ञान को साझा करने के लिए तैयार है।

इसके बाद अपने भाषण में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हा‍ल ही में हुए द्विपक्षीय आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच उच्‍च स्‍तर के विश्‍वास और समझ को प्रतिबिंबित करते हैं। ये हमारे साझा बहुआयामी द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने की इच्‍छा को रेखांकित करते हैं। वर्तमान में, भारत की अर्थव्‍यवस्‍था एक सकारात्‍मक राह पर अग्रसर है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारी सरकार ने संयुक्‍त रूप से उन क्षेत्रों की पहचान की है, जो हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है और जहां हमारी कई समानताएं भी है। उन्‍होंने कहा कि भारत को जल संसाधन के प्रबंधन, कृषि, रक्षा, अक्षय ऊर्जा, शैक्षिक आदान-प्रदान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को विकसित करने की जरूरत है। इस्राइल के पास उन्‍नत प्रौद्योगिकी है और उसने इन महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को सिद्ध किया है।

उनकी इस यात्रा से 20 साल पहले इस्राइल के पूर्व राष्ट्रपति एजर वीजमान 1996-97 में भारत आए थे। रिवलीन 15 नवंबर से 20 नवंबर तक चलने वाली अपनी छह दिवसीय भारत यात्रा के दौरान कारोबारी नेताओं और शिक्षाविदों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। शीर्ष नेताओं के साथ उनकी वार्ताएं 15 नवंबर को होनी हैं।

पिछले साल राष्ट्रपति मुखर्जी की ऐतिहासिक इस्राइल यात्रा के बाद भारत जाने में रुचि जाहिर करते हुए रिवलीन ने पहले कहा था, ‘‘दोनों देशों के बीच का सहयोग सर्वविदित है।”

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