यह वीडियो बताता है कि धरती की सारी बर्फ पिघलने पर दुनिया का नक्शा कैसे बदलेगा

153
धरती पर मौजूद सारी बर्फ पिघल गई तो कोलकाता और मुंबई जैसे कई बड़े शहर इतिहास का हिस्सा हो जाएंगे.
पेरिस में हुए जलवायु सम्मेलन में दुनिया के 195 देश एक समझौते पर पहुंच चुके हैं. इस सहमति में वैश्विक औसत तापमान में बढ़ोतरी को दो डिग्री सेल्सियस से आगे न बढ़ने देने का लक्ष्य तय किया गया है. बल्कि कोशिशें होनी हैं कि इस बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री तक ही सीमित कर दिया जाए. अब तक दर्ज किए गए सबसे गर्म साल का रिकॉर्ड 2015 के नाम होने वाला है.
बढ़ते वैश्विक तापमान यानी ग्लोबल वार्मिंग के नतीजे दुनिया के हर हिस्से में देखे जा रहे हैं. यूरोप के कई देशों में लू चलना और दक्षिण एशिया सहित तमाम इलाकों में अचानक भारी बारिश के चलते बाढ़ की घटनाओं में बढ़ोतरी इसका उदाहरण हैं. हर साल करोड़ों लोग इनसे प्रभावित हो रहे हैं.

दुनिया के दस सबसे बड़े शहरों में से आठ समुद्र किनारे बसे हुए हैं. नासा ने कहा है कि इस सदी के आखिर तक समुद्र का जलस्तर तीन फ़ीट तक बढ़ जाएगा.

लेकिन सबसे बड़ा बदलाव समुद्र में हो रहा है जहां पानी की मात्रा और इसका दायरा दोनों बढ़ रहे हैं. पानी का तापमान बढ़ने पर वह फैलने और नतीजतन ज्यादा जगह घेरने लगता है. वैज्ञानिक भाषा में इसे थर्मल एक्सपैंशन या तापीय प्रसार कहते हैं. उधर, बढ़ती गर्मी के चलते ध्रुवीय इलाकों की बर्फ तेजी से पिघल रही है. अगर यह प्रक्रिया नहीं रुकी तो इसके परिणाम कितने विनाशकारी होंगे यह इस वीडियो में देखा जा सकता है. यह दिखाता है कि धरती पर मौजूद सारी बर्फ पिघल गई तो कोलकाता जैसे कई बड़े शहर इतिहास का हिस्सा हो जाएंगे. दुनिया का नक्शा बदल जाएगा.
हालिया अध्ययन बताते हैं कि अंटार्कटिका के पश्चिमी हिस्से में मौजूद बर्फ की चादर का कुछ हिस्सा शायद एक ऐसे दौर में दाखिल हो चुका है जहां अब उसे पिघलना ही है. अकेली यही घटना आने वाली सदियों के दौरान समुद्र का स्तर औसतन तीन मीटर ऊपर उठा सकती है. हाल में सेटेलाइट से मिली तस्वीरों का अध्ययन करते हुए नासा के वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्रीनलैंड में मौजूद विशाल जैकब्श्वन ग्लेशियर से करीब आठ वर्ग किलोमीटर का एक विशाल टुकड़ा टूटकर समुद्र में जा गिरा है. इस ग्लेशियर के बारे में कहा जाता है कि अकेले इसमें ही इतनी बर्फ है जो अगर पिघल गई तो दुनिया भर में समुद्र का स्तर एक फीट से भी ऊपर जा सकता है. यानी खतरे के संकेत साफ दिख रहे हैं.
दुनिया के दस सबसे बड़े शहरों में से आठ समुद्र किनारे बसे हैं. नासा के मुताबिक इस सदी के आखिर तक समुद्र का जलस्तर तीन फ़ीट तक बढ़ जाएगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक पानी पहले तटीय शहरों के निचले इलाकों में घुसेगा. इसके बाद समुद्री तूफानों के चलते वह ऊपरी इलाकों में भी दाखिल हो जाएगा. ऐसे कारणों के चलते समुद्र तट पर बसे शहरों में बाढ़ जैसी घटनाओं की वजह से अभी ही सालाना 66 अरब रु तक का आर्थिक नुकसान हो रहा है. 2050 तक यह आंकड़ा बढ़ कर सालाना 66 खरब तक जा सकता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here