बीसीसीआई का नया अध्यक्ष कौन?

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अचानक अवसान हुआ जगमोहन डालमिया का। उनके अवसान से क्रिकेट जगत में एक शून्यता पैदा हो गई है जिसे भरा नहीं जासकेगा, ऐसा डालमिया को जानने और मानने वाले कह रहे हैं किन्तु अध्यक्ष पद को भरा जाना बीसीसीआई की सांवैधानिक जरुरत है। बीसीसीआई या ऐसा कोई भी संगठन भावनाओं से नहीं, संविधान के नियमों से चलता है। उसी से संचालित और अनुशासित होता है। बीसीसीआई के संविधान में अध्यक्ष क ी मृत्यु के पन्द्रह दिनों के अन्दर विशेष आम सभा बुलाने का प्रावधान है। 
इसी प्रावधान के क ारण अभी से नये अध्यक्ष को लेकर विचार मंथन आरम्भ हो गया है। बीसीसीआई के सामने अभी यही यक्ष प्रश्‍न है कि उसक ा अगला अध्यक्ष कौन होगा ?
क्रिकेट की राजनीति समझने वालों का ख्याल है कि फिलहाल बीसीसीआई के लिए अंतरिम अध्यक्ष की संभावना बहुत कम है। किसी कारणवश अगर अंतरिम अध्यक्ष बनाये जाने की जरुरत पड़ी तो यह मौका वरीयता के आधार पर पूर्व क्षेत्र के उपाध्यक्ष गौतम ऱॉय को मिल सकता है। जानकार बताते हैं कि बीसीसीआई मेंं अंतरिम अध्यक्ष के प्रश्‍न पर कोई विचार नहीं हो रहा है। 
जरुरत हुई तो इस संदर्भ में बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर सभी सदस्यों से सम्पर्क साध कर उनसे राय ले सकते हैं। अभी संभावना यही है कि बीसीसीआई विशेष आम सभा (एस.जी.बी.एम.) बुलाने के लिए कानून विदों की राय लेें। बीसीसीआई विश्‍व में क्रिकेट की सबसे धनी संस्था है। आईसीसी भी इसका लोहा मानती है। वहॉं होने वाली प्रत्येक गतिविधि के प्रति वैश्‍विक उत्सुकता रहती है। इस उत्सुकता के कारण अभी जो बातें प्रकाश में आ रही हैं उनके मुताबिक नये अध्यक्ष के चुनाव में बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार और डीडीसीए के अध्यक्ष केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। 
बीसीसीआई में अभी तीन महत्वपूर्ण खेमे हैं जिन्हें पवार गुट, जेटली गुट और श्रीनिवासन गुट कहा जा सकता है। आईपीएल के चेयरमैन तथा उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव राजीव शुक्ला भी यह पद पाने की लालसा रखने वालों में एक हो सकते हैं किन्तु वे अपना पत्ता तब ही खोलेंगे जब उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा हो। वे शांतिपूर्वक, सुरक्षित खेल खेलने में माहिर माने जाते हैं। उनके हक में यह बात जाती है कि शरद पवार,अरुण जेटली और एम. श्रीनिवासन तीनों से उनके अच्छे संबध हैं। उन्हें, अगर इन तीनों से समर्थन मिलने के आसार बनते दिखाई पड़ जाएं तो अध्यक्ष पद के लिए वे अपना नाम आगे कर सकते हैं। 
इस संभावना के साथ एक बात यह भी कही जा रही है कि बीसीसीआई में शरद पवार को मानने वाले और उन्हें महत्व देने वाले सदस्य भी बड़ी संख्या में हैं। ऐसा भी हो सकता है कि ये लोग अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए शरद पवार को ही मना लें। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले को उजागर करने तथा इस प्रसंग में न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करने वाले आदित्य वर्मा शरद पवार की कार्यशैली के प्रशंसक हैं।
उनका मानना है कि बीसीसीआई में व्याप्त गंदगी को दूर करने के लिए शरद पवार को आगे आना चाहिए। आदित्य वर्मा के बारे में आम राय यही है कि वे एम.श्रीनिवासन के धुर विरोधी हैं। है न अजीब स्थिति कि एक ओर तो बीसीसीआई अपना कुशल प्रशासक खोने के सदमें में है और दूसरी ओर उसे उनका ही स्थानापन्न तलाशना है। देखना है कि अगले पन्द्रह दिनों में क्या कुछ होता है और क्या कुछ सामने आता है।

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