नोट बैन पर ममता और केजरीवाल का विरोध

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दिल्ली की जनता ने सस्ते बिजली, पानी और फ्री wifi के झांसे में आकर नक्लसियों और हवाला कारोबारियों के मददगारों को सत्ता सौंप दी.

जिसकी इतनी मेहनत से कमाया गया चन्दा और डील अचानक से कचरा हो गया हो उससे पूछो उसके दिल की हलालत मतलब हालत…इनके सारे चंदे खरपतवार हो गए हैं, इनके मंत्री जो भी डील नक्सलियों से कर के आए थे, वो कचरा हो गई है.

2015 में दिल्ली चुनाव के समय इनको शहरी नक्सली कहना कोई ऐसे ही नहीं था, ज़रूर इस पर केंद्र सरकार को खुफिया विभाग से जानकारी मिली होगी.

काफी समय से नक्सली दिल्ली में सीधे अड्डा बनाना चाहते थे. बौद्धिक आतंकियों और बौद्धिक नक्सली जो बड़े बड़े लेख लिखते हैं और TV पर ज्ञान देते हैं, उनको इन्होंने इसमें मदद करने का काम किया.

इन्होंने खालिस्तानी अलगाववादियों और अरब के वहाबी कट्टरपंथियों से काफी चन्दा इकठ्ठा किया है.

इनको यहाँ से पैसे मिलने के अलावा पश्चिमी बंगाल और दंडकारण्य के जंगलों से भी माल भेजने के एवज में पैसा आता हैं.

कुछ हफ्ते पहले दिल्ली में नक्सलियों का पकड़ा जाना, JNU में हथियार मिलना, इनके के एक मंत्री का नक्सल प्रभावित जगदलपुर (बस्तर) दौरा सब लोगों को याद होगा.

क्या आपको मालूम है कि भारत में सबसे ज्यादा फ्रॉड कंपनी से व्यापार कहाँ होता है ?

हवाला से पैसे और जाली नोट की खेप भारत में पहुँचाने का सबसे बड़ा दरवाज़ा कहाँ है?

वो है पश्चिमी बंगाल… पश्चिमी बंगाल में एक तरह से नकली नोटों की सप्लाई और हवाला का उद्योग है

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