आजीवन कारावास का फरार आरोपी 4 साल बाद पुलिस की गिरफ्त में

प्रतापगढ़ : पुलिस की कस्टडी से फरार वकील के हत्याभियुक्त को पकडऩे के लिए पुलिस को काफी कवायद करनी पड़ी। आखिर उसे पुलिस चार साल बाद पकडऩे में सफल हुई है। इस दौरान वह गुजरात व पंजाब समेत कई शहरों में घूमता रहा और कमाता, खाता रहा।प्रतापगढ़ जिले के कंधई थाना के नेवरा गांव के अधिवक्ता मुन्नी लाल पाल की हत्या तीन दिसंबर 2004 को कर दी गई थी। इस मामले में दर्ज मुकदमे के आधार पर पुलिस ने उसी गांव के भूपेंद्र पाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा। बाद में कोर्ट ने उसे 20 सितंबर 2009 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आजीवन कारावास की सजा भुगतने के दौरान जेल में उसने बीमार होने की बात अधीक्षक को बताई। इस पर भूपेंद्र को इलाज के लिए पुलिस लेकर 29 अप्रैल 2014 को जिला कारागार से प्रयागराज के लिए चली। इस दौरान कोतवाली नगर के भुपियामऊ में पुलिस को चकमा देकर भूपेंद्र फरार हो गया था। इस मामले में ड्यूटी पर रहे चार सिपाही निलंबित भी किए गए थे। एसपी देवरंजन वर्मा ने उस पर 25 हजार का पुरस्कार भी घोषित कर रखा था।बुधवार को पुलिस लाइन में हुई प्रेसवार्ता में एसपी ने बताया कि भूपेंद्र की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने जाल बिछाया। वह अपने शहर के ठिकाने दहिलामऊ आ रहा था। भुपियामऊ ओवरब्रिज के नीचे घेराबंदी करके इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्रा, शहर कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव, सर्विलांस प्रभारी विनोद ङ्क्षसह, इंटेलीजेंस प्रभारी प्रमोद ङ्क्षसह, हेड कांस्टेबिल सरफराज खान, जाहिद खान, पंकज दुबे, विनोद दुबे ने पकड़ लिया। पुलिस टीम को 10 हजार का इनाम देने की घोषणा की। हत्या के साथ ही उक्त कैदी पर कोतवाली नगर व कंधई में तीन और मुकदमे भी दर्ज हैं।हत्याभियुक्त पुलिस से छिपकर रह रहा था। पहले उसने पंजाब में पारले-जी बिस्कुट कंपनी में काम किया। इसके बाद उसने ठिकाना बदला और गुजरात के सूरत में साड़ी कारखाने में काम करने लगा। उसकी गिरफ्तारी न होने पर हाईकोर्ट ने प्रतापगढ़ पुलिस को कई बार चेतावनी दी थी। उसी के बाद से पुलिस ने इसे पकडऩे के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।[ब्यूरो रिपोर्ट प्रतापगढ़]