इलाहाबाद विश्वविद्यालय और हाई कोर्ट का नाम बदलने में मुश्किलें

इलाहाबाद; संगमनगरी की पहचान रहे वहां के विश्वविद्यालय, रेलवे स्टेशन और हाईकोर्ट का नाम भी क्या बदला जाएगा या बदला जाना चाहिए? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि राज्य सरकार ऐसा करना चाहती है और उसके प्रवक्ता व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं। क्या यह सब इतना ही आसान है? सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि हम केंद्र सरकार को पत्र लिखने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय और हाईकोर्ट से प्रयाग को ख्याति मिली है। इनके नाम में परिवर्तन कराने का हम पूरा प्रयास करेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का नाम बदलने में कई अड़चनें हैैं। संसद में कानून लाए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। इससे पूर्व जिन बड़े शहरों के नाम बदलकर कोलकाता, मुंबई और चेन्नई किया गया, वहां भी उनके हाईकोर्ट के नाम नहीं बदले जा सके और वे कलकत्ता हाईकोर्ट, बांबे हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के रूप में ही जाने जाते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांस्टीट्यूशनल एंड सोशल रिर्फाम्स के अध्यक्ष अमर नाथ त्रिपाठी कहते हैं कि 1861 में कानून बनाकर कलकत्ता, बाम्बे व मद्रास हाई कोर्ट की स्थापना की गई।इसके चार साल बाद रानी विक्टोरिया ने 17 मार्च 1866 में लेटर ऑफ पेटेंट के जरिये नार्थ वेस्टर्न प्रॉविंस हाईकोर्ट की स्थापना की। 1948 में एक्ट पास कर इसका नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट रखा गया। इसलिए इसका नाम केवल संसद में संशोधन कानून लाकर ही बदला जा सकता है। उनके अनुसार रेलवे स्टेशन व अन्य केंद्रीय कार्यालयों का नाम केंद्र सरकार अनुच्छेद 73 के तहत अधिसूचना जारी कर बदल सकती है।इसी तरह इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए भी यूनिवर्सिटी एक्ट में परिवर्तन की जरूरत पड़ेगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सीएल खेत्रपाल कहते हैं कि विश्वविद्यालय का अलग स्ट्रक्चर होता है जिसमें केंद्र सरकार ही परिवर्तन कर पाएगी। ऐसा हुआ तो छात्रों की दी जाने वाली डिग्री को लेकर भी भ्रम खड़ा होगा। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी बताते हैं कि यूजीसी को भी अपने स्तर पर काफी काम करना होगा। अभी उसकी वेबसाइट पर एक और प्रयाग विश्वविद्यालय दिखाई देता है। यूजीसी इसे फर्जी घोषित कर चुकी है। नाम बदलने का फायदा यह फर्जी विश्वविद्यालय भी उठा सकता है।इलाहाबाद रेलवे स्टेशन का नाम अधिसूचना जारी करके बदला जा सकता है लेकिन इसमें समस्या यह है कि प्रयाग और प्रयाग घाट नाम से दो स्टेशन शहर में पहले से ही हैैं। तीसरा प्रयागराज हुआ तो यात्रियों में भ्रम होगा। दूरदराज के यात्रियों को आरक्षण की समस्या न हो, इसलिए प्रयागराज के साथ ही इलाहाबाद लिखना भी मजबूरी होगी। रही बात इलाहाबाद संग्रहालय की तो राज्य सरकार इसके लिए बेशक अपने स्तर पर आदेश जारी कर सकती है। [ ब्यूरो रिपोर्ट इलाहाबाद]