कमलनाथ हथियार डालने के मूड में नहीं मध्यावधि चुनाव के विकल्प की तलाश मे

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भोपाल। सीएम हाउस में कांग्रेस की बैठक चल रही है। बैठक में करीब 93 विधायकों के शामिल होने की खबर है। इस बैठक से सपा बसपा ने दूरी बनाई हुई है। मौजूदा स्थिति में क्या राह निकाली जा सकती है इसपर चर्चा की जा रही है। तमाम उलटफेर के बीच भी कमलनाथ फिलहाल हथियार डालने के मूड में नहीं दिख रहे हैं और स्थिति का सामना करने के सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक में चारों निर्दलीय विधायक भी मौजूद हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा है कि मध्यावधि चुनाव के लिए भी जाने को रहें तैयार, अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है और हम हार नहीं मानेंगे।  बीजेपी खरीद-फरोख्त कर प्रदेश को बदनाम करने पर आमदा है लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। कमलनाथ ने कहा कि एसपी और बीएसपी विधायक हमारे संपर्क में है।

सियासी उठापटक के बीच प्रदेश में अब मध्यावधि चुनाव की स्थिति बन गई है। खबर के मुताबिक कांग्रेस के सभी विधायक शाम 5:00 बजे की कांग्रेस विधायक बैठक में सर्व सहमति से इस्तीफा देंगे। और अगर ऐसा होता है तो प्रदेश में मध्यावधि चुनाव के हालात बन जाएंगे। बता दे कि भाजपा विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग कर सकती है। इससे पहले कमलनाथ सभी विधायकों से इस्तीफा दिलवा कर उसके इस मंसूबे पर पानी फेर सकते हैं।

मध्य प्रदेश का बदलता राजनीतिक समीकरण कई तरह की अटकलें तेज कर रहा है। जहां कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी राज्यपाल के आने के बाद बहुमत सिद्ध करने की मांग कर सकती है। जहां कांग्रेस को हराकर वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो इस स्थिति में बीजेपी को अपना बहुमत सिद्ध करना होगा और उसके बाद प्रदेश में उसकी सरकार बन सकती है। किंतु कमलनाथ सरकार भाजपा के इस मंसूबे पर पानी फेरने को तैयार है। माना जा रहा सीएम कमलनाथ 5:00 बजे की बैठक में कांग्रेस के विधायकों से सामूहिक इस्तीफा लेंगे। जिसके बाद प्रदेश में मध्यावधि चुनाव करवाना जरूरी हो जाएगा।

बता दे कि जब किसी पार्टी के मंत्री अपना सामूहिक इस्तीफ़ा देते हैं और समय से पहले विधानसभा भंग हो जाने की स्थिति में मध्यावधि चुनाव जरूरी हो जाता है। ऐसे में कमलनाथ सरकार चाहेगी कि भाजपा को कोई मौका ना देकर प्रदेश में मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनाई जाए।